नई दिल्ली: इजरायल की राजनीति में इस बार ‘राम’ नाम चर्चा का विषय बन सकता है। सुनने में यह बात भले ही अजीब लगे, लेकिन इसके पीछे एक राजनीतिक गणित है। अगर चुनाव के बाद किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिलता, तो एक छोटी पार्टी सरकार बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। ऐसे में सवाल है कि क्या बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता में बने रहेंगे या विपक्ष उन्हें चुनौती देकर सरकार बना लेगा? इसका जवाब इजरायल की चुनावी व्यवस्था और नतीजों के बाद होने वाले गठबंधन पर निर्भर करेगा।
इजरायल में कैसे बनती है सरकार?
इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। भारत के विपरीत, यहां मतदाता किसी उम्मीदवार के बजाय राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं। देशभर में पार्टियों को मिले वोटों के अनुपात के आधार पर उन्हें संसद में सीटें मिलती हैं। इस व्यवस्था को आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली कहा जाता है।
इजरायल में संसद में सीट पाने के लिए किसी पार्टी को कम से कम 3.25 प्रतिशत वोट हासिल करने होते हैं। कई दलों के चुनाव लड़ने के कारण किसी एक पार्टी के लिए अपने दम पर बहुमत पाना मुश्किल रहता है। इसलिए गठबंधन सरकारें बनाना आम है। चुनाव के बाद राष्ट्रपति किसी नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। उसे 61 सांसदों का समर्थन जुटाना होता है। ऐसा न होने पर दूसरे नेता को मौका मिल सकता है या दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती है।
नेतन्याहू और गादी आइजेनकोट के बीच मुकाबला
इस चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट की नई पार्टी याशार के बीच मुकाबला अहम माना जा रहा है। नेतन्याहू को दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों का समर्थन हासिल है, जबकि विपक्ष कई हिस्सों में बंटा हुआ है। चुनावी अनुमानों में नेतन्याहू के गठबंधन को करीब 50 से 55 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। यदि कोई भी पक्ष बहुमत तक नहीं पहुंचता, तो छोटी पार्टियों की भूमिका बढ़ सकती है।
इजरायल की राजनीति में ‘राम’ कौन है?
यहां ‘राम’ से मतलब राअम (Ra’am) पार्टी से है, जिसका पूरा नाम यूनाइटेड अरब लिस्ट है। इसके नेता मंसूर अब्बास हैं। यह पार्टी इजरायल के अरब नागरिकों के मुद्दे उठाती है। देश की करीब 20 प्रतिशत आबादी अरब नागरिकों की है, जिन्हें इजरायल के चुनावों में वोट देने का अधिकार है।2021 में राअम ने गठबंधन सरकार में शामिल होकर अहम भूमिका निभाई थी। मौजूदा चुनावी अनुमानों में इसे करीब पांच से छह सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। यदि बहुमत का आंकड़ा किसी भी गठबंधन से दूर रहता है, तो ये सीटें सरकार बनाने के लिए अहम हो सकती हैं।
क्या नेतन्याहू लेंगे ‘राम’ पार्टी का सहारा?
राअम की विचारधारा और नेतन्याहू की राजनीति में बड़ा अंतर है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद अरब पार्टियों के साथ गठबंधन को लेकर इजरायल में राजनीतिक मतभेद और गहरे हुए हैं। हालांकि, राअम नेता मंसूर अब्बास का कहना है कि उनकी पार्टी उन राजनीतिक समझौतों के लिए तैयार है, जिनसे अरब नागरिकों को फायदा पहुंचे। लेकिन राअम को सीटें मिलना और किसी गठबंधन को समर्थन देना अलग-अलग बातें हैं। फिलहाल यह तय नहीं है कि नेतन्याहू या विपक्ष में से कौन उसकी मदद लेगा। चुनाव के बाद होने वाली बातचीत ही इसका फैसला करेगी। ऐसे में इजरायल की अगली सरकार का रास्ता छोटी पार्टियों के समर्थन से भी खुल सकता है।












