पति का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर स्वीकारने का दबाव मानसिक क्रूरता, झारखंड हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

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नई दिल्ली: झारखंड हाई कोर्ट ने वैवाहिक रिश्ते में मानसिक क्रूरता को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि अगर कोई पति अपनी पत्नी पर उसके विवाहेतर संबंध को स्वीकार करने और दूसरी महिला के साथ रहने का दबाव बनाता है, तो यह मानसिक क्रूरता का बेहद गंभीर रूप है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने एक डॉक्टर दंपति की शादी को खत्म करने का आदेश दिया। अदालत के मुताबिक, पति का अपनी प्रेमिका को पत्नी से ‘छोटी बहन’ के रूप में स्वीकार करने के लिए कहना वैवाहिक रिश्ते की नींव को हिला देने वाला व्यवहार है।

प्रेमिका को छोटी बहन मानने का दबाव बना रहा था पति

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने फैमिली कोर्ट के पुराने फैसले को पलटते हुए यह टिप्पणी की। हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने मामले में मौजूद सबूतों का अलग-अलग आकलन किया और उन सभी तथ्यों को एक साथ देखने में चूक की। साथ ही, वैवाहिक विवादों में लागू होने वाले ‘संभावनाओं की प्रबलता’ के सिद्धांत पर भी उचित ध्यान नहीं दिया गया।

अदालत ने कहा कि शादी का रिश्ता आपसी भरोसे, सम्मान, साथ और साझा अनुभवों पर टिका होता है। जब पति-पत्नी के बीच विश्वास टूट जाता है, तो रिश्ते को पहले जैसा बनाना बेहद मुश्किल हो जाता है। कोर्ट के अनुसार, पत्नी को पति के दूसरी महिला के साथ संबंध को स्वीकार करने के लिए मजबूर करना ऐसी मानसिक पीड़ा है, जो वैवाहिक जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।

2019 से अलग रह रहे थे डॉक्टर दंपति

मामले से जुड़े दोनों पक्ष पेशे से डॉक्टर हैं। उनकी शादी फरवरी 2018 में हुई थी और शादी के बाद वे धनबाद में रहने लगे थे। पति टुंडी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत था, जबकि पत्नी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) में नौकरी करती थीं। हालांकि, उनके बीच विवाद बढ़ने के बाद सितंबर 2019 से दोनों अलग-अलग रहने लगे थे। अब हाई कोर्ट के फैसले से इस विवाह का कानूनी अंत हो गया है।

पत्नी ने लगाए मारपीट और अफेयर के आरोप

पत्नी का आरोप था कि उसके पति का एक विधवा महिला के साथ विवाहेतर संबंध था। परिवार के हस्तक्षेप के बाद पति ने लिखित रूप से भरोसा दिलाया था कि वह उस महिला से संपर्क खत्म कर देगा। हालांकि, पत्नी के अनुसार, उसने अपना संबंध जारी रखा। विरोध करने पर पति ने उसके साथ मारपीट भी की, जिससे उसे कई स्वास्थ्य समस्याएं हुईं। इनमें स्लिप-डिस्क और ट्रॉमेटिक ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी परेशानियां शामिल थीं।

दूसरी ओर, पति ने इन आरोपों को नकारते हुए पत्नी के पिता के क्लिनिक से जारी मेडिकल पर्चों को फर्जी बताया। उसने जनवरी 2023 में वैवाहिक अधिकारों की बहाली के पक्ष में एकतरफा आदेश मिलने का भी हवाला दिया था।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मेडिकल पर्चों को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि वे पत्नी के पिता के क्लिनिक से जारी हुए थे। अदालत ने माना कि पति के व्यवहार के कारण पत्नी को वैवाहिक घर छोड़ना पड़ा था। इन्हीं तथ्यों और मानसिक क्रूरता के आधार पर हाई कोर्ट ने शादी समाप्त करने का फैसला सुनाया।

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