नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संभावित नए हमलों की चर्चा के बीच चीन ने पश्चिम एशिया में शांति कायम करने के लिए अपनी कूटनीतिक कोशिशें तेज कर दी हैं। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने साफ कहा है कि खाड़ी और पश्चिम एशिया का इलाका दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच मुकाबले का केंद्र नहीं बनना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयास जारी हैं।
रॉयटर्स के मुताबिक, शी चिनफिंग ने सोमवार को चीन की पहली आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सैद से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अरब देशों के साथ मिलकर क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने की इच्छा जताई। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, शी ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े बदलावों से गुजर रही है। ऐसे हालात में क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को साथ आना होगा। उन्होंने युद्ध रोकने और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का हल निकालने में चीन की भूमिका निभाने की भी बात कही।
ईरान और खाड़ी देशों का दौरा करेंगे चीनी दूत
चीन ने शांति की पहल को आगे बढ़ाने के लिए अपने विशेष दूत झाई जून को इसी महीने पश्चिम एशिया भेजने का फैसला किया है। वह ईरान, ओमान और सऊदी अरब का दौरा करेंगे। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान क्षेत्रीय तनाव कम करने और बातचीत का रास्ता निकालने पर चर्चा होगी। गौरतलब है कि चीन अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में गारंटर की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। वर्ष 1978 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद ओमान के किसी राष्ट्राध्यक्ष की यह पहली चीन यात्रा है।
होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही पर जोर
चीन और ओमान ने 20 बिंदुओं वाले संयुक्त बयान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सामान्य और सुरक्षित आवाजाही बहाल करने की जरूरत बताई। दोनों देशों ने अमेरिका और ईरान से सैन्य टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की। साथ ही संघर्ष रोकने के लिए जून में हुए समझौते पर लौटने और वार्ता फिर शुरू करने की मांग की।
इसी बीच ईरान के उप सुरक्षा प्रमुख अली बाघेरी कानी भी चीन पहुंचे। यहां उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। वांग यी ने ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा के समर्थन की बात कही। उन्होंने सभी पक्षों से विवाद का समाधान बातचीत और राजनीतिक तरीके से निकालने की अपील की।











