नई दिल्ली: एक महीने से अधिक समय तक धरने-प्रदर्शनों और राजनीतिक आंदोलनों के चलते सुस्त प collड़े दिल्ली के बाजारों में अब दिवाली की चमक लौटने लगी है। ग्राहकों की बढ़ती भीड़, दुकानों पर रौनक और खरीदारी के उत्साह ने व्यापारियों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी है। लंबे समय से आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे कारोबारियों को अब उम्मीद है कि त्योहारों का यह मौसम बीते नुकसान की भरपाई करेगा।
प्रवीन खंडेलवाल ने बताया राजनीतिक व्यवधानों का असर
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री एवं चांदनी चौक के सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि पिछले एक महीने में राजनीतिक गतिविधियों और जनजीवन में बार-बार आए व्यवधानों ने दिल्ली के व्यापार को प्रभावित किया। बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही घटी और बाहर से आने वाले खरीदारों की संख्या भी कम हुई। हालांकि, दिवाली से पहले बाजारों में लौटी चहल-पहल कारोबार के लिए शुभ संकेत है।
धनतेरस से भाई दूज तक खरीदारी का सिलसिला तेज होगा
खंडेलवाल के मुताबिक 6 नवंबर को धनतेरस, 7 को छोटी दिवाली, 8 को दीपावली, 9 को गोवर्धन पूजा और 10 नवंबर को भाई दूज के साथ खरीदारी का सिलसिला तेज होगा। इसके बाद छठ पूजा, तुलसी विवाह और गुरु नानक जयंती के अलावा विवाह समारोहों, क्रिसमस और नववर्ष से भी कारोबार को गति मिलेगी।
कैट का अनुमान: दिल्ली में एक लाख करोड़ से अधिक का व्यापार
कैट ने देशभर में दिवाली के दौरान सात लाख करोड़ रुपये से अधिक तथा अकेले दिल्ली में एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के व्यापार का अनुमान जताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी उत्पाद खरीदने के आह्वान का असर भी बाजारों में दिखाई दे रहा है। घरेलू सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, सजावटी वस्तुओं और उपहारों की मांग बढ़ रही है। इससे छोटे दुकानदारों, कारीगरों और उद्यमियों को मजबूती मिलेगी। खंडेलवाल ने विश्वास जताया कि त्योहारों और शादी-ब्याह का मौसम दिल्ली के व्यापार को नई उड़ान देगा।
Reported By: Pankaj Rai












