नई दिल्ली: रूस ने भारत को एक ऐसा ऑफर दिया है, जो किसी और देश को नहीं मिला है। मास्को का कहना है कि अगर भारत S-400 मिसाइल सिस्टम के 5 और स्क्वाड्रन खरीदता है, तो रूस S-500 एयर डिफेंस सिस्टम की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ जॉइंट और लोकल प्रोडक्शन के लिए भी तैयार है। रूस ने अभी तक किसी भी देश को S-500 नहीं बेचा है। यह ऑफर सिर्फ भारत के लिए है, जो अपने आप में बेहद खास है।
क्या है S-500 की ताकत?
S-500 को 55R6M ट्रायमफेटर-एम के नाम से भी जाना जाता है। यह रूस का सबसे आधुनिक और शक्तिशाली एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे अल्माज-एंटेई कंपनी ने बनाया है। यह सिस्टम लंबी दूरी की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के अलावा अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट को भी मार गिरा सकता है। इसकी ऑपरेशनल रेंज एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए 600 किमी और सामान्य एयर डिफेंस के लिए 400 से 500 किमी है। यह 180 से 200 किमी की ऊंचाई पर मौजूद लक्ष्य को भी भेद सकता है।
हाइपरसोनिक मिसाइलों का काल
S-500 की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्पीड है। यह 5 से 7 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से उड़ने वाली हाइपरसोनिक मिसाइलों को भी ट्रैक कर मार गिरा सकता है। यह दुनिया का इकलौता ऐसा सिस्टम है, जो हाइपरसोनिक लक्ष्यों को नष्ट कर सकता है। इसका रिएक्शन टाइम सिर्फ 4 सेकंड है। यह इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल, हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल, स्टील्थ फाइटर जेट, अवाक्स विमान और लो अर्थ ऑर्बिट के सैटेलाइट को भी नष्ट करने में सक्षम है।
भारत को क्या फायदा होगा?
डिफेंस सिक्योरिटी एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह सौदा होता है तो भारत की रक्षा शक्ति में बड़ा इजाफा होगा। साथ ही स्वदेशी डिफेंस इंडस्ट्री को भी बूस्ट मिलेगा और भारत-रूस रक्षा संबंध और मजबूत होंगे। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर में S-400 के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत 5 और स्क्वाड्रन खरीदने पर विचार कर रहा है। हालांकि अभी इस पर कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।
भारत के पास अभी S-400 के चार स्क्वाड्रन हैं। इनमें सबसे नया स्क्वाड्रन मई-जून में डिलीवर हुआ था। 2018 के समझौते का आखिरी स्क्वाड्रन जनवरी-फरवरी में मिलेगा। इसके कंपोनेंट दिसंबर से आने शुरू हो जाएंगे। पहले यह डिलीवरी नवंबर तक पूरी होनी थी, लेकिन यूक्रेन युद्ध की वजह से देरी हुई।












