नई दिल्ली: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि को अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व माना जाता है. यह नौ दिनों तक चलने वाला धार्मिक उत्सव है जिसमें भक्त दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं. इन नौ स्वरूपों को सामूहिक रूप से नवदुर्गा कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इन दिनों में माता दुर्गा अपने भक्तों के बीच विराजमान रहती हैं और सच्चे मन से पूजा करने वालों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं.
साल 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से होगी और इसका समापन 27 मार्च को रामनवमी के साथ होगा. इन नौ दिनों में हर दिन देवी के अलग अलग रूप की पूजा का विधान है.
पहले दिन
नवरात्रि के पहले दिन 19 मार्च को शैलपुत्री की पूजा की जाती है. इसी दिन घरों में घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है. मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री और शक्ति का मूल स्वरूप माना जाता है.
दूसरे दिन
दूसरे दिन 20 मार्च को ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. यह देवी तप, त्याग और साधना का प्रतीक मानी जाती हैं. मान्यता है कि उनकी पूजा से धैर्य और आत्मबल की प्राप्ति होती है.
तीसरे दिन
नवरात्रि के तीसरे दिन 21 मार्च को चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. मां चंद्रघंटा को साहस और शक्ति की देवी माना जाता है और उनकी आराधना से भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है.
चौथे दिन
चौथे दिन 22 मार्च को कुष्मांडा की पूजा का विधान है. धार्मिक मान्यता के अनुसार उन्होंने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी. उनकी पूजा से सुख समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है.
पांचवें दिन
पांचवें दिन 23 मार्च को स्कंदमाता की आराधना की जाती है. वह भगवान कार्तिकेय की माता मानी जाती हैं. उनकी पूजा से संतान सुख और ज्ञान की प्राप्ति होती है.
छठे दिन
छठे दिन 24 मार्च को कात्यायनी की पूजा की जाती है. देवी कात्यायनी को साहस और शक्ति का प्रतीक माना जाता है और उनकी आराधना से जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है.
सातवें दिन
सातवें दिन 25 मार्च को कालरात्रि की पूजा होती है. उनका स्वरूप उग्र माना जाता है लेकिन वे भक्तों को भय और संकट से मुक्त करती हैं.
आठवें दिन
आठवें दिन 26 मार्च को महागौरी की पूजा की जाती है. इस दिन कई घरों में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. मां महागौरी शांति और पवित्रता का प्रतीक मानी जाती हैं.
अंतिम दिन
नवरात्रि के अंतिम दिन 27 मार्च को सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. इसी दिन रामनवमी का पर्व भी मनाया जाता है और नौ दिनों की साधना का समापन हवन और पूजा के साथ होता है.
चैत्र नवरात्रि केवल धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि भक्ति, साधना और आत्मशक्ति का उत्सव भी माना जाता है. इन नौ दिनों में देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
















