अब रिश्तों से ज्यादा से ज्यादा फोन को दे रहे है समय, दुनिया में धड़ल्ले से घट रही बर्थ रेट

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Low Birth Rate
Low Birth Rate

दुनिया भर में गिरती जन्म दर को लेकर अब तक आर्थिक तंगी, करियर का दबाव, महंगी जीवनशैली और छोटे घरों को जिम्मेदार माना जाता था. लेकिन हाल ही में हुए वैज्ञानिक शोधों और रिपोर्ट्स ने एक ऐसा चौंकाने वाला एंगल सामने रखा है, जिसने पूरी दुनिया में सनसनी मचा दी है. विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का मानना है कि वैश्विक स्तर पर आबादी घटने के पीछे अब ‘स्मार्टफोन’ और ‘सोशल मीडिया’ एक बहुत बड़ी वजह बन चुके हैं. हमारे हाथों में चौबीसों घंटे रहने वाली इस तकनीक ने इंसानी रिश्तों और सामाजिक ताने-बाने को इस कदर बदला है कि अब लोग पहले के मुकाबले बेहद कम बच्चे पैदा कर रहे हैं.

दो-तिहाई देशों में खतरे की घंटी

फाइनेंशियल टाइम्स की एक होश उड़ाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय दुनिया के दो-तिहाई से अधिक देशों में जन्म दर यानी फर्टिलिटी रेट उस बुनियादी स्तर से भी काफी नीचे जा चुकी है, जिसे किसी देश की आबादी को स्थिर रखने के लिए जरूरी माना जाता है. आसान शब्दों में कहें तो इन देशों में अब इतने बच्चे भी पैदा नहीं हो रहे हैं जो पुरानी पीढ़ी की जगह ले सकें. यह समस्या पहले जापान, दक्षिण कोरिया ,चीन , अमेरिका तक सीमित है.

स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने बढ़ाई दूरियां

पिछले 10 से 15 सालों के भीतर वैश्विक जन्म दर में जो अचानक और तीव्र गिरावट आई है, उसे केवल आर्थिक या वित्तीय कारणों से नहीं समझा जा सकता. स्मार्टफोन और हाई-स्पीड इंटरनेट के आने के बाद से युवाओं का आपसी मेल-जोल बेहद कम हो गया है. लोग अब वास्तविक दुनिया में संबंध बनाने के बजाय स्क्रीन पर अधिक समय बिता रहे हैं. इस डिजिटल लत ने समाज में अकेलेपन को बढ़ावा दिया है, जिसका सीधा और नकारात्मक असर शादी और परिवार बढ़ाने के फैसलों पर पड़ रहा है.

इस विषय पर अमेरिका और ब्रिटेन में एक बेहद दिलचस्प स्टडी की गई, जिसमें वहां 4G इंटरनेट नेटवर्क लॉन्च होने के बाद के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. इस अध्ययन में यह हैरान करने वाला तथ्य सामने आया कि जिन भौगोलिक क्षेत्रों में हाई-स्पीड मोबाइल इंटरनेट सबसे पहले पहुंचा, ठीक उन्हीं इलाकों में जन्म दर में सबसे ज्यादा तेजी से गिरावट दर्ज की गई.

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