छत्तीसगढ़ में 17 दिन में 3 हाथी के बच्चों की मौत, मचा हड़कंप

0
7
Chattisgarh
Chattisgarh

छत्तीसगढ़: धरमजयगढ़ वन मंडल में 17 दिनों के भीतर तीन हाथी के बच्चों की मौत से हड़कंप मच गया है. लगातार हो रही इन मौतों ने वन विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं. इस गंभीर स्थिति से निपटने और मौतों के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए वन विभाग ने देहरादून, बरेली और जबलपुर से वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की एक विशेष टीम को आमंत्रित किया है. यह टीम न केवल मौत के कारणों की जांच करेगी बल्कि स्थानीय वन कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी देगी.

3 हाथी के बच्चों की मौत

हालिया घटना रविवार की है जब पुरेदा-अमझार वन परिक्षेत्र के अंतर्गत एक तालाब के दलदली इलाके में फंसने से एक हाथी के शावक की जान चली गई. वन कर्मियों के बचाव प्रयासों के बावजूद शावक को बचाया नहीं जा सका. दिल दहला देने वाली बात यह रही कि शावक की मां घंटों तक अपने बच्चे के पास खड़ी रही और उसे बचाने के लिए आसपास के पेड़ों को भी उखाड़ डाला। पिछले 17 दिनों में यह तीसरी और पिछले पांच महीनों में इस क्षेत्र में आठवीं मौत है.

ऐसा क्यों हो रहा है?

वन अधिकारियों के अनुसार धरमजयगढ़ वन मंडल में जनवरी से लेकर अब तक आठ हाथी के बच्चों की मौत हो चुकी है. इन मौतों के पीछे मुख्य रूप से डूबने, दलदल में फंसने और कुछ अन्य अज्ञात कारण शामिल हैं. जनवरी में एक हाथी का बच्चा कुएं में गिर गया था. जिसके बाद मार्च से मई के बीच कई शावकों की मौत दर्ज की गई.

बारीकी से हो रही जांच

धरमजयगढ़ के संभागीय वन अधिकारी किशोर कुमार उपाध्याय ने बताया कि विशेषज्ञों की यह टीम मौत के कारणों की बारीकी से जांच करेगी, जंगल की वर्तमान स्थिति का अध्ययन करेगी और स्थानीय स्टाफ को पोस्टमार्टम प्रक्रियाओं, सैंपल कलेक्शन और वन्यजीव आपातकालीन प्रतिक्रिया का प्रशिक्षण देगी.

हाथियां तालाबों की ओर रुख करने को मजबूर

अधिकारियों ने अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है लेकिन वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या भोजन और पानी की कमी के कारण हाथियों के झुंड इंसानी बस्तियों और उनके आसपास के तालाबों की ओर रुख करने को मजबूर हो रहे हैं.

वन विभाग के लिए बड़ी चुनौतियां

यह संकट छत्तीसगढ़ में सिमटते जंगलों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की बदहाली को उजागर करता है. पानी के स्रोतों का सूखना या उनका दलदल में तब्दील होना वन्यजीवों के लिए काल बन रहा है. आने वाले दिनों में बाहरी राज्यों से आई यह विशेषज्ञ टीम प्रभावित वन क्षेत्रों का दौरा करेगी.

बढ़ सकता है संकट

टीम का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर आवास की स्थिति का मूल्यांकन करना और भविष्य में हाथी के बच्चों की अकाल मृत्यु को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी उपाय सुझाना है. स्थानीय पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि समय रहते प्राकृतिक जल निकायों को सुधारा नहीं गया और जंगलों का कटाव नहीं रोका गया तो यह संकट और गहरा सकता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here