चैटजीपीटी से पूछे बम बनाने के तरीके, ड्रोन से लाल किला उड़ाने की साजिश का NIA ने किया बड़ा खुलासा

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Delhi Lal Quila Blast News
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नई दिल्ली: लाल किला ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म और डिजिटल माध्यमों का कथित तौर पर इस्तेमाल कर विस्फोटक बनाने की जानकारी जुटाई. चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि आरोपियों ने रॉकेट आईईडी तैयार किए और जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीकुंड जंगल में उनकी टेस्टिंग भी की थी.

एनआईए की 7,500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट में बताया गया है कि इस साजिश में शामिल आरोपी वैश्विक आतंकी संगठन अल-कायदा की शाखा से जुड़े हुए थे. जांच एजेंसी के अनुसार, विस्फोटक तैयार करने से लेकर ड्रोन को हथियार बनाने तक की पूरी योजना बेहद सुनियोजित तरीके से तैयार की गई थी.

अल-कायदा से जुड़े मॉड्यूल का खुलासा

विशेष एनआईए अदालत में दाखिल आरोप पत्र के मुताबिक, चार्जशीट में शामिल एक आरोपी अंसार गजवत-उल-हिंद  के अंतरिम आतंकी मॉड्यूल का इन-हाउस इंजीनियर था. यह संगठन भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा से जुड़ा हुआ बताया गया है. गृह मंत्रालय पहले ही AQIS और उसकी शाखाओं को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है. चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपी जासिर बिलाल वानी तकनीकी सहायता देने के लिए 2024-25 के दौरान हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस में दो से तीन बार रुका था.

यूनिवर्सिटी और डॉक्टरों की भूमिका जांच के दायरे में

जांच एजेंसियों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी में काम करने वाले तीन डॉक्टर कथित तौर पर इस ब्लास्ट साजिश से जुड़े पाए गए हैं. आरोप है कि डॉ. अदील अहमद राथर ने जासिर की मुलाकात मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी से कराई थी, जो विस्फोटक से भरी कार चला रहा था. चार्जशीट के अनुसार, इस धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे.

AI और  यूट्यूब से जुटाई विस्फोटक बनाने की जानकारी

एनआईए की जांच में सामने आया है कि आरोपी जासिर ने यूट्यूब और चैटजीपीटी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लिया था. चार्जशीट के मुताबिक उसने यह सर्च किया था कि रॉकेट कैसे बनाया जाए और विस्फोटक मिश्रण का अनुपात क्या होना चाहिए. जांच एजेंसी का कहना है कि डॉ. अदील ने आईईडी बनाने के लिए पिसी हुई चीनी और NPK खाद के रूप में पोटेशियम नाइट्रेट जैसी सामग्री उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई, जबकि डॉ. उमर ने घरेलू रॉकेट आईईडी को लेकर रिसर्च और दिशानिर्देश दिए.

जंगल में हुई रॉकेट IED की टेस्टिंग

चार्जशीट में दावा किया गया है कि जासिर ने कथित तौर पर रॉकेट आईईडी तैयार किए और डॉ. उमर, डॉ. मुजम्मिल शकील समेत अन्य आरोपियों के साथ मिलकर काजीकुंड के जंगलों में उनका परीक्षण किया. एनआईए ने बताया कि आरोपी के खुलासे के बाद जांच टीम ने जंगल के अंदर से इन उपकरणों के अवशेष बरामद किए थे.

ड्रोन को हथियार बनाने की थी योजना

जांच में यह भी सामने आया कि डॉ. उमर ने जासिर को दो ड्रोन दिए थे और उनकी उड़ान क्षमता तथा वजन उठाने की ताकत बढ़ाने के निर्देश दिए थे. चार्जशीट के मुताबिक, इन ड्रोनों में विस्फोटक लगाकर उन्हें हथियार में बदलने और कश्मीर समेत देश के अन्य हिस्सों में सुरक्षा ठिकानों पर हमला करने की योजना थी. इसके अलावा अनंतनाग के मट्टन इलाके के पास युशमर्ग जंगल में सिलेंडर वाले IED का परीक्षण भी किया गया था.

फिलिप कार्ड से मंगाए गए थे ट्रिगर मैकेनिज्म के पार्ट्स

एनआईए की फोरेंसिक जांच में यह भी सामने आया कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच जासिर ने अपने फिलिप कार्ड अकाउंट से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मंगाए थे. इनमें सेंसर-इंडक्टिव प्रॉक्सिमिटी स्विच, हीट गन, पीजो प्लेट, रिमोट कंट्रोल रिले-स्विच RF ट्रांसमीटर और रिसीवर किट, फ्लेमलेस रीचार्जेबल पॉकेट लाइटर, सोल्डरिंग किट और LED इलेक्ट्रॉनिक किट शामिल थे. चार्जशीट के अनुसार, इन सामानों की खरीद के लिए पैसे डॉ. उमर ने दिए थे और जासिर ने इन पार्ट्स को जोड़कर ट्रिगर मैकेनिज्म तैयार किया था.

TATP विस्फोटक का हुआ इस्तेमाल

एनआईए ने अपनी जांच में पाया कि लाल किला इलाके के पास हुए धमाके में ट्रायसिटोन ट्रायपरऑक्साइड विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था. जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने विभिन्न प्रकार के IED तैयार किए और उनकी टेस्टिंग भी की थी.

दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट केस में NIA की जांच ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. आरोपियों ने चैटजीपीटी  और यूट्यूब से IED व रॉकेट बनाने की जानकारी जुटाई, जंगलों में टेस्टिंग की और ड्रोन हमले की साजिश रची. जांच में अल-कायदा से जुड़े आतंकी नेटवर्क के संकेत भी मिले हैं.

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