NI-5 एक्सप्रेसवे को हरी झंडी, दिल्ली से कटरा का सफर होगा आधे समय में पूरा

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Delhi Katra Expressway
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नई दिल्ली: देश में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने NI-5 दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे को आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में शामिल कर अधिसूचित कर दिया है. अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी, जिसके बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी. माना जा रहा है कि 2026 के अंत तक इस एक्सप्रेसवे पर निर्माण कार्य शुरू हो सकता है.

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के रूप में मंजूरी

यह हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने का काम करेगा. खास बात यह है कि इससे दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने में भी मदद मिलेगी. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 के तहत इसे राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के रूप में मंजूरी दी है.

दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे बनने के बाद माता वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा. फिलहाल दिल्ली से कटरा तक सड़क मार्ग से पहुंचने में करीब 15 से 17 घंटे का समय लगता है, लेकिन नया हाई-स्पीड कॉरिडोर बनने के बाद यह दूरी केवल 6 से 8 घंटे में पूरी की जा सकेगी. इससे यात्रा न केवल तेज होगी बल्कि अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक भी बनेगी.

यह एक्सप्रेसवे दिल्ली के रानी खेड़ा गांव के पास एनएच-344एम से शुरू होकर जसौर खेरी के पास कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा. इसके बाद यह हरियाणा और पंजाब के कई अहम शहरों से गुजरते हुए जम्मू-कश्मीर के कटरा तक पहुंचेगा. हरियाणा में यह गोहाना, खरखौदा, कलायत, बुटाना और बारटा जैसे इलाकों को जोड़ेगा, जबकि पंजाब में करतारपुर, पाट्रान, मलेरकोटला, अहमदगढ़, भवानीगढ़, नूरमहल और गुरदासपुर बाईपास जैसे क्षेत्रों से होकर निकलेगा. अंत में यह कटरा के पास एनएच-144 से कनेक्ट होगा.

सरकार का क्या मानना है?  

सरकार का मानना है कि इस परियोजना से सिर्फ धार्मिक पर्यटन को ही बढ़ावा नहीं मिलेगा, बल्कि व्यापार और कृषि क्षेत्र को भी फायदा पहुंचेगा. किसानों और व्यापारियों के लिए माल ढुलाई आसान होगी और कम समय में सामान एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सकेगा. इसके अलावा वैष्णो देवी के आसपास मौजूद धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

फिलहाल परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और अब डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इसके बाद जमीन अधिग्रहण और निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा.

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