Hariyali Teej 2026: तिथि, पूजा विधि और व्रत का महत्व, जानें क्यों खास है यह पर्व

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Hariyali Teej 2026,
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नई दिल्ली: सावन का महीना अपने साथ हरियाली, बारिश की फुहारें और कई पवित्र त्योहार लेकर आता है. इन्हीं में से एक है हरियाली तीज, जिसका सुहागिन महिलाओं के जीवन में विशेष महत्व माना जाता है. यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि पति-पत्नी के अटूट प्रेम, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि का भी संदेश देता है. इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और अपने पति की लंबी आयु तथा सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत रखती हैं. वहीं अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करती हैं.

कब मनाई जाएगी हरियाली तीज 2026?

हिंदू पंचांग के अनुसार हरियाली तीज का पर्व हर वर्ष सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. वर्ष 2026 में हरियाली तीज 12 अगस्त, बुधवार के दिन पड़ेगी. इस दिन शिव-पार्वती की विशेष पूजा का विधान है और महिलाएं पूरे विधि-विधान से व्रत रखकर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं.

हरियाली तीज का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी. उनकी अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया. इसी पावन मिलन की स्मृति में हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से माता गौरी और भगवान शिव की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम और विश्वास बना रहता है. साथ ही परिवार में खुशहाली और सौभाग्य का वास होता है.

हरियाली तीज की पूजा विधि

हरियाली तीज की पूजा पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ की जाती है. पूजा के दौरान इन बातों का विशेष ध्यान रखें.

सुबह जल्दी उठकर करें स्नान- ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे हरे या लाल रंग के वस्त्र पहनें. हरा रंग हरियाली, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है.

पूजा की सामग्री तैयार करें- पूजा के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. इसके साथ सुहाग का सामान जैसे सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी, काजल, चुनरी और अन्य श्रृंगार सामग्री भी रखें.

व्रत का संकल्प लें- पूजा शुरू करने से पहले माता गौरी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. इसके बाद उन्हें सोलह श्रृंगार अर्पित करें और सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद मांगें.

शिव-पार्वती की पूजा करें- भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, अक्षत और जल अर्पित करें. इसके बाद माता पार्वती की पूजा करें. मान्यता है कि दोनों की संयुक्त पूजा करने से वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर होती हैं.

व्रत कथा का श्रवण करें- पूजा के अंत में हरियाली तीज की व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कथा के बिना व्रत और पूजा अधूरी मानी जाती है.

हरियाली तीज का उत्सव और परंपराएं

हरियाली तीज का दिन महिलाओं के लिए उत्साह और खुशियों से भरा होता है. इस अवसर पर महिलाएं हाथों में मेहंदी लगाती हैं, सुंदर श्रृंगार करती हैं और नए वस्त्र पहनती हैं. कई स्थानों पर पेड़ों पर झूले डाले जाते हैं, जहां महिलाएं झूला झूलते हुए पारंपरिक सावन गीत गाती हैं. इस दिन घेवर, मालपुआ, खीर और अन्य पारंपरिक मिठाइयां भी बनाई जाती हैं. परिवार और रिश्तेदार एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं, जिससे आपसी प्रेम और अपनापन और मजबूत होता है.

हरियाली तीज पर क्या करें?

भगवान शिव और माता पार्वती की पूरे विधि-विधान से पूजा करें.
सात्विक भोजन का पालन करें और यदि व्रत रख रहे हैं तो नियमों का पालन करें.
जरूरतमंद लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार दान करें.
माता-पिता और परिवार के बड़े सदस्यों का आशीर्वाद लें.
घर में सकारात्मक और शांत वातावरण बनाए रखें.
हरियाली तीज पर क्या नहीं करना चाहिए?
पूजा और व्रत के दिन काले या गहरे नीले रंग के कपड़े पहनने से बचें.
किसी के प्रति मन में ईर्ष्या, क्रोध या द्वेष की भावना न रखें.
तामसिक भोजन और नशे से पूरी तरह दूर रहें.
पूजा के दौरान जल्दबाजी न करें और पूरे मन से भगवान शिव-पार्वती का स्मरण करें.

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