लखनऊ: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच एक बड़े संगठनात्मक बदलाव की खबर सामने आई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सरकार्यवाह सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी ने राम मंदिर ट्रस्ट के ‘पालक’ यानी संरक्षक पद से इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट ने आधिकारिक तौर पर उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया है। हालांकि इस फैसले के पीछे आधिकारिक कारण उनके स्वास्थ्य का ठीक न होना बताया गया है, लेकिन सियासी और संगठनात्मक गलियारों में इस बदलाव के कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।
अब जबकि ट्रस्ट के नए स्वरूप को गढ़ा जा रहा है और आंतरिक प्रशासनिक फेरबदल जारी हैं, भैयाजी जोशी का पद छोड़ना राम मंदिर के भावी प्रबंधन मॉडल को लेकर नए सवाल और चर्चाएं पैदा कर रहा है।
संघ और भाजपा के बीच संवाद की सबसे मजबूत कड़ी
भैयाजी जोशी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उन गिने-चुने कद्दावर चेहरों में शुमार रहे हैं, जिन्हें संघ और भारतीय जनता पार्टी के बीच समन्वय की सबसे अहम धुरी माना जाता रहा है। वर्षों तक संगठन में उनका दबदबा रहा और केंद्र व राज्य स्तर पर कई नीतिगत निर्णयों में उनकी सलाह निर्णायक साबित होती थी। राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण की पूरी यात्रा में उनका मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में ट्रस्ट के शीर्ष संरक्षक पद से उनका हटना महज एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भावी संगठनात्मक रूपरेखा का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
जानिए क्या होती है ‘पालक’ पद की भूमिका
राम मंदिर ट्रस्ट में ‘पालक’ का पद प्रतिदिन के प्रशासनिक कामकाज से अलग, एक उच्चस्तरीय मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। इस पद पर बैठे व्यक्ति का मुख्य काम ट्रस्ट की गतिविधियों पर सूक्ष्म नजर रखना, वित्तीय व संगठनात्मक पारदर्शिता सुनिश्चित करना और विवादों की स्थिति में सही दिशा देना होता है। भैयाजी जोशी इसी संरक्षक दायित्व को संभालते हुए व्यवस्था का मार्गदर्शन कर रहे थे, जिससे अब उन्होंने खुद को अलग कर लिया है।
संकट के समय मिली थी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
भैयाजी जोशी की ‘पालक’ पद पर तैनाती कोई साधारण नियुक्ति नहीं थी। कुछ साल पहले जब राम मंदिर ट्रस्ट पर जमीन खरीद प्रक्रिया को लेकर अनियमितताओं और वित्तीय हेराफेरी के आरोप लगे थे, तब माहौल काफी गरमा गया था। उस नाजुक दौर में ट्रस्ट की साख बचाने और प्रशासनिक ढांचे को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से संघ ने अपने सबसे विश्वसनीय और अनुभवी चेहरे भैयाजी जोशी को संरक्षक बनाकर भेजा था।












