तेजस्वी बोले- उर्दू, अरबी-फारसी शिक्षकों से भेदभाव बंद करे सरकार

0
7
Bihar
Bihar

पटना: बिहार में शिक्षकों के तबादले और बकाये वेतन के मामले पर अब सूबे की सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक तीखा पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए तेजस्वी ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली, शिक्षकों के ट्रांसफर में हो रही अनियमितताओं और वेतन भुगतान में देरी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इसको प्रशासनिक लापरवाही और पक्षपातपूर्ण रवैया करार दिया।

भेदभाव का आरोप

तेजस्वी यादव ने अपने पत्र में राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के तबादले की मौजूदा नीति पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी है और भाषा शिक्षकों के साथ खुला पक्षपात किया जा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि कई विद्यालयों में जहां इन भाषाओं के केवल एक ही शिक्षक पदस्थापित थे, उन्हें भी ‘सरप्लस’ यानी जरूरत से ज्यादा घोषित कर तबादला सूची में डाल दिया गया है। 

वेतन और भाषा सम्मान की मांग

शिक्षकों के तबादले के अलावा तेजस्वी यादव ने अनुदानित मदरसों और संस्कृत विद्यालयों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि इन संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मियों का लंबे समय से अटका हुआ वेतन तुरंत जारी किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने हर सरकारी विद्यालय में उर्दू और संस्कृत के शिक्षकों की अनिवार्य पदस्थापना सुनिश्चित करने की अपील की। तेजस्वी ने कहा कि संस्कृत और उर्दू हमारी भाषाई व सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं, इसलिए किसी भी भाषा, विषय या शिक्षक के साथ नीतिगत भेदभाव नहीं होना चाहिए। तेजस्वी का कहना है कि किसी विषय के एकमात्र शिक्षक को हटा देने से स्कूलों में उस भाषा की पढ़ाई पूरी तरह ठप होने के कगार पर पहुंच जाएगी। उन्होंने इसको प्रशासनिक लापरवाही और पक्षपातपूर्ण रवैया करार दिया।

प्रखंडों में गुरुकुलम स्थापना की तैयारी

दूसरी तरफ, विपक्षी हमलों के बीच राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था के ढांचे को नया रूप देने में जुटी है। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने घोषणा की है कि राज्य के प्रत्येक प्रखंड में समेकित विद्यालय और गुरुकुलम स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों में आधुनिक शिक्षा के साथ वेद-विज्ञान और कौशल विकास का पाठ भी पढ़ाया जाएगा। सरकार इस योजना की शुरुआत बक्सर जिले से करने जा रही है। एक राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मंत्री ने अधिकारियों को नसीहत दी कि वे केवल दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर जनता और जनप्रतिनिधियों से संवाद कायम करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here