नई दिल्ली: पाकिस्तान में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण होते दिख रहे हैं। सरकार ने पंजाब गृह विभाग की सिफारिश पर रावलपिंडी में अगले छह महीनों के लिए सेना तैनात करने को मंजूरी दे दी है। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत लिया गया है ताकि शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके और किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके।
तीन कंपनियां तैनात, संवेदनशील ड्यूटी पर रहेगी आर्मी
गृह एवं मादक द्रव्य नियंत्रण मंत्रालय की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि पाकिस्तान सेना की तीन कंपनियों को रावलपिंडी में संवेदनशील सुरक्षा कर्तव्यों के लिए तैनात किया गया है।
सरकार का कहना है कि यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है। किसी भी आपात या अनपेक्षित स्थिति में जिला प्रशासन की मदद के लिए सेना अगले छह महीने तक शहर में मौजूद रहेगी।
गोलीबारी की घटना के बाद लिया गया फैसला
यह फैसला हाल ही में रावलपिंडी में हुई एक सुरक्षा घटना के बाद आया है। बताया जा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ से जुड़े एक व्यक्ति ने रावलपिंडी में सुरक्षा बलों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी। जवाबी कार्रवाई में वह हमलावर मारा गया।
सरकारी चैनल PTV न्यूज ने सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया कि मारा गया हमलावर खैबर जिले का रहने वाला था और PTI का सक्रिय कार्यकर्ता था। उसके पास से पार्टी का झंडा, हथियार और गोलियां बरामद हुईं। हालांकि PTI ने इन आरोपों को साजिश बताया है।
21 अगस्त को PTI ने आरोप लगाया था कि सरकार ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया। पार्टी के मुताबिक इमरान खान को प्राइवेट अस्पताल की बजाय सरकारी अस्पताल में चेकअप कराकर वापस जेल भेज दिया गया, जिसके बाद से कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।
रावलपिंडी में सेना की तैनाती क्यों है इतनी संवेदनशील
रावलपिंडी में सेना की तैनाती को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि यहीं पर पाकिस्तान सेना का मुख्यालय GHQ स्थित है। यह शहर पाकिस्तान का सबसे प्रमुख सैन्य और प्रशासनिक केंद्र है। यहां सेना का उतरना इस बात का संकेत है कि सरकार को बड़े विरोध प्रदर्शन या सुरक्षा खतरे का अंदेशा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद से PTI और सरकार के बीच टकराव बढ़ा है और रावलपिंडी में सेना की मौजूदगी किसी बड़े राजनीतिक संकट की आहट हो सकती है।












