नई दिल्ली: कोलंबो के ऐतिहासिक मैदान पर भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच की शुरुआत भारतीय टीम के लिए काफी उथल-पुथल भरी रही है। कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने की ठानी, मगर पहले ही सत्र में मेजबान गेंदबाजों ने भारत की ठोस शुरुआत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। मैच का शुरुआती घंटा जहाँ नई गेंद से निपटने और लंबी पारी की नींव रखने का था, वहीं भारतीय ओपनिंग जोड़ी क्रीज पर सेट होने के बावजूद अपने इरादों को मंजिल तक नहीं पहुँचा सकी।
राहुल गंवा बैठे मौका
पारी का पहला झटका केएल राहुल के रूप में लगा, जो बेहद निराशाजनक तरीके से पवेलियन लौटे। लाहिरू कुमारा की बाहर जाती शॉर्ट पिच गेंद पर क्रॉस-बैटेड स्लैश शॉट खेलने की कोशिश में राहुल अपना संतुलन खो बैठे।
गेंद उनके बल्ले का बाहरी किनारा लेकर विकेटकीपर डिकवेला के दस्तानों में समा गई। 18 रन पर राहुल का यह गैर-जिम्मेदाराना शॉट भारतीय खमे को भारी पड़ा।
जायसवाल ने खोया आपा
इसके बाद क्रीज पर नजरें जमा चुके यशस्वी जायसवाल से एक बड़ी पारी की आस थी। उन्होंने असिथा फर्नांडो के एक ही ओवर में तीन करारे चौके जड़कर दबाव हटाने का प्रयास किया। लेकिन ओवर की आखिरी गेंद पर फर्नांडो की राउंड द विकेट से अंदर आती लेंथ बॉल ने उन्हें पूरी तरह छका दिया। शॉट खेलने की कोशिश में गेंद अंदरूनी किनारा लेती हुई सीधे स्टंप्स से जा टकराई और जायसवाल अर्धशतक के करीब पहुँचकर भी आउट हो गए। आउट होने की खीझ में जायसवाल अपना आपा खो बैठे और श्रीलंकाई गेंदबाज से जा भिड़े, जिसे मैदानी अंपायरों ने शांत कराया।
33 की उम्र में सारांश जैन का ऐतिहासिक डेब्यू
मैच की इस खींचतान के बीच भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक नया अध्याय भी दर्ज हुआ। स्पिनर कुलदीप यादव के इंफेक्शन के कारण बाहर होने पर मध्य प्रदेश के 33 वर्षीय ऑलराउंडर सारांश जैन को डेब्यू कैप सौंपी गई। 33 साल और 145 दिन की उम्र में टेस्ट क्रिकेट में कदम रखने वाले सारांश 21वीं सदी में भारत के सबसे उम्रदराज टेस्ट डेब्यूटेंट बन गए हैं। इससे पहले साल 2000 में सबा करीम ने ढाका में बांग्लादेश के खिलाफ 32 साल 362 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी। पहले ही सत्र में दो प्रमुख विकेट गंवा चुकी भारतीय टीम को अब अपनी पारी को संभालने के लिए मध्यक्रम से एक मजबूत और संयमित साझेदारी की सख्त दरकार है।












