राहुल गांधी से मुलाकात के बाद NSUI सदस्य ने बदला नाम, ‘वी द छोटू’ से जताई नाराजगी

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नई दिल्ली: कांग्रेस के अपने ही छात्र संगठन में इन दिनों एक नाम को लेकर नाराजगी की सुगबुगाहट है। विरोध प्रदर्शनों में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की मौजूदगी कुछ लोगों को रास नहीं आई। हालात ऐसे बने कि मामला पार्टी हाईकमान तक पहुंच गया।

कांग्रेस और AISA, दोनों स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में गड़बड़ी का दावा करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। दोनों दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के साथ नेहा बोरा के जुड़ने से कुछ लोग असहज हो गए। खास बात यह है कि ये लोग बाहर के नहीं, बल्कि कांग्रेस के अपने छात्र संगठन के हैं।

NSUI में नाराजगी

कांग्रेस के एक कार्यक्रम में नेहा बोरा राहुल गांधी के साथ मंच साझा करती दिखीं। कई मौकों पर वे वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ भी खड़ी नजर आईं। यह बात कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के पदाधिकारियों को पसंद नहीं आई।,नाराजगी इतनी बढ़ी कि NSUI के एक सदस्य ने तीन दिनों के लिए एक आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप का नाम बदलकर ‘वी द छोटू’ रख दिया। यहां ‘छोटू’ का मतलब छोटा या काम करने वाला सहायक लड़का होता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि बात राहुल गांधी तक पहुंची। जब NSUI पदाधिकारियों ने उनसे मुलाकात की और शिकायत दूर की गई, तब जाकर ग्रुप का नाम वापस बदला गया।

मार्च में आगे चलीं नेहा बोरा

12 अक्टूबर को इंडी गठबंधन के नेता चुनावों में धांधली का दावा करते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च कर रहे थे। उस दौरान सबसे आगे चल रही दो महिलाओं में नेहा बोरा भी थीं। उनके कंधे पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का हाथ था। दूसरी महिला कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा थीं, और नेहा उनके दाईं ओर चल रही थीं।

नेहा उस बस में भी दिखीं, जिसमें शीर्ष नेता सवार थे। बाद में वे उस ट्रक पर भी नजर आईं, जहां राहुल गांधी कुछ चुनिंदा लोगों के साथ प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच खड़े थे। वहां NSUI का नेतृत्व भी मौजूद था, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ शामिल थे। इसके बावजूद नेहा बोरा को जो अहमियत मिली, उसने उन्हें इस विरोध प्रदर्शन का एक प्रमुख चेहरा बना दिया। कई बार वे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) जैसी चर्चित इकाइयों से भी आगे दिखाई दीं। यही बात NSUI के नेताओं को खटक गई।

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