मिडिल ईस्ट में चल रहे जंग के बीच ब्रिटेन ने 35 देशों के साथ ऑनलाइन बैठक की, जिसमें युद्ध को खत्म करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर चर्चा किया गया. इस दौरान भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने भी इस वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया. बैठक के दौरान उन्होंने जल्द से जल्द स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने की मांग की.
भारत ने इस बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि वह इस क्षेत्र में अकेला ऐसा देश है जिसने युद्ध के कारण अपने नागरिकों को खोया है. विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बैठक में भारत का आधिकारिक रुख दोहराया.
बैठक में क्या बोले विदेश सचिव?
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि चल रहे संकट का समाधान केवल कूटनीति और बातचीत से ही संभव है. उन्होंने सभी पक्षों से तनाव कम करने और संवाद के रास्ते पर लौटने की अपील की. भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित और मुक्त आवागमन को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया. विदेश सचिव ने बैठक में भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के गंभीर प्रभाव की चर्चा की और बताया कि पश्चिम एशिया की अस्थिरता सीधे भारत के आर्थिक हितों को प्रभावित कर रही है.
भारत एकमात्र देश जिसके नाविकों की हुई मौत
विदेश मंत्रालय ने बैठक में यह तथ्य रेखांकित किया कि भारत ही एकमात्र देश है जिसके नाविकों की खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में मौत हुई है. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के अनुसार, अब तक विदेशी झंडे वाले कम से कम तीन भारतीय नाविक मारे गए हैं और एक घायल हुआ है. इन जहाजों पर सवार भारतीय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हुए थे.
इसके अलावा, पूरे संघर्ष में अब तक आठ भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है जबकि एक अभी भी लापता है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि मंत्रालय, जहाजरानी मंत्रालय और क्षेत्रीय दूतावासों के समन्वय से सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सक्रिय है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं. विदेश मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि सभी भारतीय सुरक्षित हैं और दूतावास उनके साथ निरंतर संपर्क में हैं.
















