नई दिल्ली: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग कर रहे अंकिता के माता-पिता को पुलिस ने हिरासत में ले लिया, हालांकि कुछ समय बाद उन्हें छोड़ दिया गया। वे भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के फैसले का विरोध कर रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने भी पुलिस और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। बुधवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने इंडिया गेट पर प्रदर्शन कर रहे लोगों से मुलाकात की थी। उन्होंने अंकिता के माता-पिता से बातचीत कर न्याय की लड़ाई में सहयोग का भरोसा दिया।
अंकिता के माता-पिता का कहना है कि जब तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति वापस नहीं ली जाती, उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने सरकार को फैसला लेने के लिए 24 घंटे का समय दिया है। अंकिता की मां ने चेतावनी दी कि यदि उन्हें इंडिया गेट पर धरना देने की अनुमति नहीं मिलती, तो वे अपने घर में ही भूख हड़ताल शुरू कर देंगी। वहीं, उनके पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने राष्ट्रपति से मांग की है कि मामले की सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
2022 में हुई थी अंकिता भंडारी की हत्या
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड ने वर्ष 2022 में पूरे देश का ध्यान खींचा था। अंकिता एक रिजॉर्ट में काम करती थीं। हत्या के चार दिन बाद उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ था। इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता को दोषी ठहराया गया था। अदालत ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
कथित वीआईपी को लेकर फिर उठे सवाल
पिछले साल दिसंबर में सोशल मीडिया पर कुछ कथित ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर फिर बहस शुरू हुई थी। इसके बाद राजनीतिक विवाद भी बढ़ गया। कांग्रेस का आरोप है कि मामले में सवालों के घेरे में रहे दुष्यंत गौतम को राज्यपाल नियुक्त किया जाना उचित नहीं है। हालांकि, उनसे जुड़ी कथित भूमिका और आरोपों की पुष्टि को लेकर कोई निष्कर्ष इस रिपोर्ट में सामने नहीं है।
फिलहाल अंकिता के माता-पिता अपनी मांगों पर अड़े हैं। दिल्ली में जारी प्रदर्शन के बीच यह मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।












