राष्ट्रपति भवन की भव्यता देख अभिभूत हुए पूर्वोत्तर के विद्यार्थी, राष्ट्रीय गौरव की भावना हुई प्रबल

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नई दिल्ली: देश की ऐतिहासिक विरासत को करीब से जानने और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी महाविद्यालय के पूर्वोत्तर प्रकोष्ठ ने राष्ट्रपति भवन का शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, इतिहास, स्थापत्य कला और देश की समृद्ध विरासत को करीब से देखा। यह यात्रा उनके लिए ज्ञानवर्धक होने के साथ भावनात्मक रूप से भी यादगार रही।

प्राचार्य ने भ्रमण का शुभारंभ किया

भ्रमण का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर दरविंदर कुमार ने किया। उनके प्रेरणादायक शब्दों ने विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया। पूर्वोत्तर के विद्यार्थियों के लिए महाविद्यालय में समावेशी, सहयोगपूर्ण और स्वागतपूर्ण वातावरण तैयार करने में उनका निरंतर सहयोग महत्वपूर्ण रहा है।

विद्यार्थियों ने संग्रहालय और लुटियंस वास्तुकला का अवलोकन किया

पूर्वोत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों से आए कई विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रपति भवन की यह पहली यात्रा थी। संग्रहालय में अपने गृह राज्यों से संबंधित झलकियां देखकर उनमें अपनत्व और राष्ट्रीय गौरव की भावना जागृत हुई। विद्यार्थियों ने अशोक मंडप में फतह-अली शाह के शिकार दृश्य को दर्शाने वाले फारसी भित्तिचित्र, आकर्षक कढ़ाईदार वस्त्र ऐतिहासिक कलाकृतियों और विभिन्न देशों से मिले कूटनीतिक उपहारों का अवलोकन किया। इन धरोहरों ने उन्हें भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और वैश्विक संबंधों की महत्वपूर्ण जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने प्रसिद्ध वास्तुकार एडविन लुटियंस की स्थापत्य परिकल्पना और लुटियंस दिल्ली के विकासक्रम को भी समझा।

संयोजक ने राष्ट्रीय गौरव पर जोर दिया

पूर्वोत्तर प्रकोष्ठ की संयोजक डॉ. अनुभूति मिश्रा ने कहा कि इस यात्रा ने विद्यार्थियों में राष्ट्रीय गौरव की भावना को मजबूत किया है और उन्हें राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित किया है। इस अवसर पर संकाय सदस्य डॉ. अनिंदिता गोल्डर डॉ. रेशमा तबस्सुम और सुश्री अंजलि तोमर भी विद्यार्थियों के साथ मौजूद रहीं। नागालैंड की प्रकोष्ठ अध्यक्ष विनिका के. चिशी ने इस अनुभव को जीवन को समृद्ध बनाने वाला बताया। वहीं मणिपुर के महासचिव लकी वारेपम ने इन यादगार पलों को अपने गृह नगर के लोगों के साथ साझा करने की उत्सुकता जताई। यह शैक्षणिक पहल संदेश देती है कि भारत की विविध संस्कृतियां ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति हैं और साझा विरासत देश की एकता को नई मजबूती प्रदान करती है।

 

Reported By: Pankaj Rai

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