करवा चौथ 2026: मंगेतर के लिए रखना है व्रत? जानें कुंवारी लड़कियों के लिए पूजा के जरूरी नियम

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नई दिल्ली: करवा चौथ का व्रत आमतौर पर विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से रखती हैं। हालांकि, जिन लड़कियों की शादी तय हो चुकी है, उनमें से कई अपने होने वाले पति के लिए भी यह व्रत रखती हैं। ऐसे में उनके मन में कई सवाल उठते हैं कि क्या उन्हें भी सरगी खानी चाहिए, 16 श्रृंगार करना चाहिए और चांद देखकर ही व्रत खोलना चाहिए? आइए जानते हैं ज्योतिष एक्सपर्ट और वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, कुंवारी लड़कियों के लिए करवा चौथ की पूजा विधि और जरूरी नियम।

कुंवारी लड़कियां कैसे करें करवा चौथ की पूजा?

कुंवारी लड़कियां अपने होने वाले पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करें। इसके लिए साफ जगह पर देवी-देवताओं की तस्वीर स्थापित करें, दीपक जलाएं और फूल, फल व जल से भरा कलश अर्पित करें। इसके बाद करवा चौथ की कथा पढ़ें या सुनें और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करें। वहीं, सरगी आमतौर पर विवाहित महिलाओं को उनकी सास की ओर से दी जाती है, इसलिए कुंवारी लड़कियों के लिए इसे लेना जरूरी नहीं है। अगर आप पूरे दिन निर्जला व्रत नहीं रख सकती हैं, तो सूर्योदय से पहले हल्का और सात्विक भोजन कर सकती हैं। व्रत रखते समय अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है।

क्या कुंवारी लड़कियों को 16 श्रृंगार करना चाहिए?

करवा चौथ पर विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के साथ 16 श्रृंगार करती हैं। वहीं, कुंवारी लड़कियों के लिए 16 श्रृंगार करना जरूरी नहीं है। वे चाहें तो इस दिन पारंपरिक कपड़े पहन सकती हैं और हाथों में मेहंदी लगा सकती हैं। पूजा के लिए लाल, गुलाबी या दूसरे पसंदीदा रंगों के कपड़े पहनना उनकी अपनी पसंद हो सकती है। हालांकि, सिंदूर, मंगलसूत्र और बिछिया जैसी वैवाहिक निशानियां पहनने की जरूरत नहीं है। इसी तरह, पूजा के दौरान थाली घुमाने या दूसरी महिलाओं के साथ थाली बदलने की रस्म करना भी उनके लिए जरुरी नहीं माना जाता। सबसे जरूरी बात यह है कि पूजा पूरे मन और श्रद्धा के साथ की जाए।

कुंवारी लड़कियां कैसे खोलें करवा चौथ का व्रत?

परंपरागत रूप से विवाहित महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। वहीं, कुछ मान्यताओं के अनुसार, कुंवारी लड़कियां भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के बाद व्रत खोल सकती हैं। कुछ परंपराओं में तारों के दर्शन करने का भी विधान बताया जाता है। मंगेतर का चेहरा छलनी से देखना उनके लिए जरूरी नहीं माना जाता।

ध्यान दें,अगर पूरे दिन निर्जला व्रत रखने से कमजोरी या चक्कर आने जैसी परेशानी हो, तो अपनी सेहत को प्राथमिकता दें। व्रत का उद्देश्य श्रद्धा और मन की शांति है, इसलिए अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए ही उपवास करें।

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