नई दिल्ली। डिजिटल करेंसी और क्रिप्टो ट्रेडिंग के बढ़ते कारोबार के बीच वित्तीय नियमों के उल्लंघन का एक बड़ा मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दो क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म CoinDCX और Delta Exchange के खिलाफ जांच तेज करते हुए बेंगलुरु में तीन ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई 4 और 5 नवंबर को की गई। जांच एजेंसी को संदेह है कि इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिना आवश्यक सरकारी अनुमति के अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो लेन-देन किया गया और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) का बड़े पैमाने पर उल्लंघन हुआ। मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि इसमें हजारों करोड़ रुपये के सीमा पार डिजिटल लेन-देन की जांच की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
ईडी की जांच का मुख्य केंद्र विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर डेरिवेटिव ट्रेडिंग करवाने और इसके माध्यम से भारत से बड़ी रकम विदेश भेजने के आरोप हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों भारतीय प्लेटफॉर्म कथित तौर पर बिना जरूरी मंजूरी अपने ग्राहकों को विदेशी क्रिप्टो वेबसाइटों पर इस तरह की ट्रेडिंग की सुविधा उपलब्ध करा रहे थे। इतना ही नहीं, इस कारोबार का प्रचार भी किया जा रहा था।
कैसे काम करती है डेरिवेटिव ट्रेडिंग?
सामान्य शेयर या क्रिप्टो ट्रेडिंग में निवेशक किसी कंपनी का शेयर या डिजिटल करेंसी खरीदकर उसका मालिक बनता है। इसके विपरीत डेरिवेटिव ट्रेडिंग में किसी संपत्ति को सीधे खरीदने के बजाय उसकी भविष्य की कीमत बढ़ने या घटने पर सौदा किया जाता है। इसमें कीमतों के उतार-चढ़ाव के आधार पर मुनाफा या नुकसान होता है। ईडी इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन प्लेटफॉर्म ने जरूरी नियमों का पालन किए बिना भारतीय ग्राहकों को ऐसे सौदों से जोड़ा।
USDT के जरिए विदेश भेजी जाती थी रकम
जांच में डिजिटल स्टेबलकॉइन USDT के इस्तेमाल का मामला भी सामने आया है। USDT को डिजिटल डॉलर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी कीमत आमतौर पर एक अमेरिकी डॉलर के बराबर बनाए रखने का प्रयास किया जाता है। ब्लॉकचेन तकनीक के माध्यम से इसे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से ट्रांसफर किया जा सकता है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से बाहर रकम ट्रांसफर करने के लिए किया गया। आमतौर पर विदेशों में पैसा भेजने के दौरान बैंकिंग प्रणाली और भारतीय रिजर्व बैंक के नियम लागू होते हैं।
Binance और अन्य विदेशी प्लेटफॉर्म से लेन-देन
ईडी की जांच के मुताबिक, CoinDCX की ओर से कथित तौर पर कारोबारी खर्चों और ट्रांजैक्शन फीस के नाम पर USDT के माध्यम से Binance, KuCoin और Bybit जैसे विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म को सैकड़ों करोड़ रुपये के बराबर रकम भेजी गई।
वहीं, Delta Exchange पर ग्राहकों के कई सौदों को CoinDCX के जरिए आगे भेजने और अपनी विदेशी साझेदार कंपनियों को भी रकम ट्रांसफर करने के आरोप हैं। एजेंसी अब इन लेन-देन के पूरे नेटवर्क और पैसे के स्रोतों की जांच कर रही है।
FEMA के अलावा अन्य कानूनों के उल्लंघन का भी संदेह
जांच का दायरा केवल विदेशी मुद्रा कानून तक सीमित नहीं है। ईडी की ओर से इन कंपनियों के वित्तीय उत्पादों और कारोबारी ढांचे की भी पड़ताल की जा रही है। जांच में सेबी अधिनियम 1992, सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स अधिनियम 1956 और आरबीआई अधिनियम 1934 से जुड़े नियमों के उल्लंघन की आशंका भी सामने आई है।
आम निवेशकों की पूंजी पर भी पड़ सकता है असर
इस मामले का सबसे बड़ा असर इन प्लेटफॉर्म पर कारोबार करने वाले आम निवेशकों पर पड़ सकता है। यदि जांच के दौरान एजेंसियां बैंक खातों या क्रिप्टो वॉलेट को फ्रीज करने जैसे सख्त कदम उठाती हैं, तो ग्राहकों की जमा रकम और डिजिटल संपत्तियां फंस सकती हैं। इससे पैसा निकालने में देरी होने या निवेशकों को वित्तीय नुकसान का खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।












