देहरादून: उत्तराखंड में मानसून की तेज बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. लगातार हो रही बारिश के कारण राज्य के कई इलाकों में भूस्खलन, सड़क बंद होने और मकानों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आई हैं. हालात को देखते हुए प्रशासन ने कई एहतियाती कदम उठाए हैं. बदरीनाथ-केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग कई घंटों तक बंद रहा, जबकि सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ते खतरे को देखते हुए आदि कैलास और ओम पर्वत यात्रा भी अगले आदेश तक रोक दी गई है.
मौसम विज्ञान केंद्र ने शुक्रवार के लिए नैनीताल और बागेश्वर जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है. इसके अलावा देहरादून, टिहरी, पौड़ी, चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के कुछ हिस्सों में भी तेज बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया गया है. प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है.
ज्योतिर्मठ में मलबा आने से दो मकानों को नुकसान
बारिश के दौरान ज्योतिर्मठ के पगनो गांव में पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा नीचे आ गया. इससे सतेश्वर प्रसाद के मकान की छत क्षतिग्रस्त हो गई और मलबा घर के भीतर तक पहुंच गया. घटना के समय उनकी पत्नी सुरक्षित बाहर निकल गईं, लेकिन सतेश्वर प्रसाद मलबे के बीच फंस गए. स्थानीय लोगों और राहत दल की मदद से करीब आधे घंटे बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया. वहीं, यमुनोत्री धाम के जानकीचट्टी क्षेत्र में पहाड़ी से बोल्डर गिरने के कारण नारायण पुरी गांव निवासी संदीप सिंह के मकान को भी नुकसान पहुंचा.
करीब 12 घंटे तक बंद रहा बदरीनाथ हाईवे
चमोली जिले के गुलाबकोटी क्षेत्र में भारी मलबा और बड़े पत्थर आने से बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग तड़के करीब चार बजे बंद हो गया. सड़क पर लगभग 300 मीटर तक मलबा फैल जाने के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया. करीब 12 घंटे की मशक्कत के बाद शाम लगभग साढ़े चार बजे सड़क को दोबारा खोला गया. इस दौरान बदरीनाथ आने-जाने वाले श्रद्धालुओं और अन्य यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा. हाईवे के दोनों ओर कई किलोमीटर तक वाहनों की कतारें लगी रहीं. मार्ग खुलने के बाद प्रशासन ने पहले बदरीनाथ की ओर से लौट रहे वाहनों को सुरक्षित तरीके से ऋषिकेश की ओर रवाना किया.
भूस्खलन से सड़क बनी दलदल
अधिकारियों के अनुसार गुरुवार देर रात हुई मूसलाधार बारिश के कारण पगनो गांव के ऊपर स्थित पहाड़ियों में बड़ा भूस्खलन हुआ. तेज बहाव के साथ आया मलबा गांव, खेतों, रास्तों और जंगलों को नुकसान पहुंचाते हुए लगभग छह किलोमीटर नीचे गुलाबकोटी के पास बदरीनाथ हाईवे तक पहुंच गया. मलबे और बड़े-बड़े पत्थरों के कारण सड़क का बड़ा हिस्सा दलदल में बदल गया, जिससे पूरे दिन वाहनों की आवाजाही बंद रही.
आदि कैलास और ओम पर्वत यात्रा फिलहाल स्थगित
लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने आदि कैलास और ओम पर्वत यात्रा अगले आदेश तक रोक दी है. अब श्रद्धालुओं के लिए इनरलाइन परमिट जारी नहीं किए जाएंगे. अधिकारियों का कहना है कि धारचूला से आगे तवाघाट, मांगती और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में मानसून के दौरान भूस्खलन और बोल्डर गिरने का खतरा काफी बढ़ जाता है. यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया गया है. प्रशासन ने देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि मौसम सामान्य होने तक यात्रा की योजना स्थगित रखें.
दो महीनों में पहुंचे रिकॉर्ड श्रद्धालु
इस वर्ष 1 मई से शुरू हुई आदि कैलास और ओम पर्वत यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला. मई और जून के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से कुल 52,441 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे, जो पिछले वर्षों की तुलना में रिकॉर्ड संख्या मानी जा रही है.
चमोली जिले में सबसे अधिक सड़कें प्रभावित
लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक 23 सड़कें चमोली जिले में बंद हुई हैं. इसके अलावा देहरादून में 20, टिहरी में 14, पिथौरागढ़ में 9, पौड़ी और बागेश्वर में 8-8, रुद्रप्रयाग में 6, नैनीताल में 4 और अल्मोड़ा में 3 सड़कें प्रभावित हुई हैं. सड़कों के बंद होने से गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों में हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. गढ़वाल क्षेत्र में ही 10 हजार से अधिक लोगों का संपर्क प्रभावित हुआ है. लोक निर्माण विभाग के प्रमुख राजेश शर्मा ने बताया कि देर शाम तक 25 सड़कों को दोबारा खोल दिया गया था, जबकि बाकी मार्गों को जल्द से जल्द चालू करने के लिए राहत और मरम्मत का कार्य लगातार जारी है.
















