नई दिल्ली: कहते हैं कुछ चीजें बाजार से खरीदी जा सकती हैं लेकिन उनसे जुड़ी यादों की कोई कीमत नहीं होती। मोबाइल फोन भी आज ऐसी ही जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। उसमें किसी की वर्षों पुरानी तस्वीरें हैं, किसी के अपनों के नंबर किसी की नौकरी और कारोबार से जुड़े जरूरी दस्तावेज तो किसी के लिए वह परिवार और दुनिया से जुड़े रहने का सबसे बड़ा सहारा है। यही वजह है कि जब मोबाइल गुम होता है तो सिर्फ एक उपकरण नहीं खोता, बल्कि उसके साथ यादों और जरूरतों का एक पूरा संसार भी जैसे दूर चला जाता है।लेकिन राजधानी दिल्ली में कई लोगों के लिए यह कहानी एक सुखद मोड़ पर पहुंची। दिल्ली पुलिस के ‘ऑपरेशन विश्वास’ ने गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन तलाशकर उनके असली मालिकों तक पहुंचाए और एक बार फिर साबित किया कि तकनीक जब खाकी की मेहनत से मिलती है तो उम्मीद को हकीकत में बदल सकती है।
1600 से ज्यादा मोबाइल और उतनी ही मुस्कानें
अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर दिल्ली पुलिस की रेलवे, मेट्रो और आईजीआई हवाईअड्डा इकाइयों ने ‘ऑपरेशन विश्वास’ के तहत विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान 1600 से अधिक बरामद मोबाइल फोन उनके वास्तविक मालिकों को लौटाए गए। कार्यक्रम में 100 से ज्यादा नागरिक स्वयं पहुंचे। इनमें बड़ी संख्या वरिष्ठ नागरिकों की रही। हाथों में वापस आया मोबाइल और चेहरों पर नजर आई राहत ने इस पूरे अभियान को महज पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि भरोसे और संवेदना की कहानी बना दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिवहन रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त राजनीश गुप्ता ने की।
तकनीक ने दिखाई राह, पुलिस की मेहनत ने पहुंचाया मंजिल तक
ऑपरेशन विश्वास की कहानी सिर्फ पुलिस की तलाश तक सीमित नहीं है। इसके पीछे आधुनिक तकनीक की भी अहम भूमिका रही। दूरसंचार विभाग के केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर यानी सीईआईआर पोर्टल के जरिए गुम मोबाइल के विशिष्ट आईएमईआई नंबर को ब्लॉक किया जाता है। इसके बाद जब उस मोबाइल में नया सिम कार्ड डाला जाता है तो सिस्टम से सूचना मिलने पर पुलिस की टीमें सक्रिय होती हैं। तकनीकी जानकारी को जमीनी स्तर पर पुलिस की कार्रवाई से जोड़कर मोबाइल की तलाश की जाती है और बरामदगी के बाद उसे उसके वास्तविक मालिक तक पहुंचाया जाता है।।यानी मोबाइल कहीं भी चला गया हो उसकी पहचान पुलिस की तकनीकी निगाहों से बचना आसान नहीं।
बुजुर्गों के लिए सिर्फ सुरक्षा नहीं सहारा भी
अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर दिल्ली पुलिस ने वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एक अलग चेहरा भी सामने रखा। रेलवे और मेट्रो परिसरों में बुजुर्ग यात्रियों की मदद उनका सामान उठाने उन्हें ट्रेन के कोच तक पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर उनके लापता परिजनों की तलाश में सहायता जैसे प्रयासों पर जोर दिया गया।संयुक्त पुलिस आयुक्त राजनीश गुप्ता ने कहा कि जिस समाज में बुजुर्गों का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित होती है वही समाज अपनी संवेदनशीलता की पहचान बनाता है। दिल्ली पुलिस वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और सहायता के लिए प्रतिबद्ध है।
जब मोबाइल लौटा तो लौट आईं यादें
ऑपरेशन विश्वास के दौरान मोबाइल वापस पाने वाले कई नागरिकों के लिए यह सिर्फ फोन की वापसी नहीं थी। फोन के साथ उनकी पुरानी तस्वीरें, संपर्क, जरूरी जानकारियां और रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा वापस आया।किसी के लिए यह परिवार की तस्वीरों की वापसी थी, तो किसी के लिए जरूरी कामकाजी संपर्कों की। यही वजह रही कि मोबाइल हाथ में आते ही कई चेहरों पर राहत साफ दिखाई दी और नागरिकों ने पुलिस अधिकारियों का आभार जताया।
मोबाइल के बाद अब साइबर ठगों पर भी नजर
कार्यक्रम को साइबर जागरूकता से भी जोड़ा गया। दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को ऑनलाइन ठगी से बचने के उपाय बताए और वित्तीय साइबर अपराध होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर सूचना देने की अपील की।संदिग्ध कॉल और संदेशों की जानकारी संचार साथी की ‘चक्षु’ सुविधा के माध्यम से देने, व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया खातों पर दो-स्तरीय सुरक्षा सक्रिय करने तथा किसी के साथ ओटीपी, पिन या पासवर्ड साझा नहीं करने की सलाह दी गई।पुलिस ने लोगों को अनजान लिंक, संदिग्ध एपीके और अज्ञात स्रोतों से आने वाली जिप फाइलों से भी सावधान रहने को कहा। साइबर ठगी की स्थिति में बैंक खाते की जानकारी, ठगी की रकम, घटना की तारीख-समय और लेनदेन संदर्भ संख्या जैसी जानकारी तैयार रखने की सलाह दी गई।
खाकी का संदेश सिर्फ कानून नहीं, भरोसा भी
ऑपरेशन विश्वास की सबसे बड़ी तस्वीर उन नागरिकों के चेहरों पर दिखाई दी, जिनके हाथों में उनका खोया मोबाइल दोबारा था। यह अभियान बताता है कि पुलिसिंग केवल अपराधियों की गिरफ्तारी और कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर नागरिक की छोटी से छोटी परेशानी को समझना और उसका समाधान तलाशना भी पुलिस सेवा का अहम हिस्सा है।1600 से ज्यादा मोबाइल फोन की वापसी ने दिल्ली में भरोसे की एक नई कहानी लिखी है।और इस कहानी का फिल्मी क्लाइमेक्स शायद यही है—जिसे समझ बैठे थे खो गया हमेशा के लिए दिल्ली पुलिस ने ढूंढकर वही अपना फिर से लौटा दिया।
Reported by- Pankaj Rai












