नई दिल्ली: सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को तुरंत इलाज मिले, इसके लिए पंजाब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य की फरिश्ते स्कीम-2024 को अब केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स हास्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट यानी पीएम-राहत स्कीम-2025 में मर्ज कर दिया गया है।
परिवहन विभाग के कार्यालय आदेश के मुताबिक ये फैसला तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। मकसद है हादसा पीड़ितों को बेहतर समन्वय के साथ तेज और कैशलेस उपचार देना।
क्या है पीएम-राहत स्कीम?
केंद्र सरकार ने 5 मई 2025 को मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत कैशलेस ट्रीटमेंट ऑफ रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स स्कीम लागू की थी। बाद में इसे पीएम-राहत नाम दिया गया। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय यानी मोर्थ ने 4 जून 2025 को इसके लिए विस्तृत गाइडलाइन भी जारी कर दीं।
इन्हीं निर्देशों के आधार पर पंजाब ने अपनी फरिश्ते स्कीम को पीएम-राहत में एकीकृत किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने फरिश्ते स्कीम को 25 जनवरी 2024 को अधिसूचित किया था। अब वो औपचारिक रूप से पीएम-राहत का हिस्सा मानी जाएगी।
किसे मिलेगा फायदा
योजना के तहत देश में किसी भी श्रेणी की सड़क पर मोटर वाहन दुर्घटना में घायल व्यक्ति को कैशलेस उपचार मिलेगा। शर्त ये है कि उसे ट्रामा या पॉली ट्रामा का इलाज चाहिए। लिस्टेड अस्पतालों को जिम्मेदारी दी गई है कि वो पीड़ित का तुरंत इलाज करें, इलाज की जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करें और फिर प्रतिपूर्ति के लिए दावा भेजें।
दावों के निपटारे के लिए स्टेट हेल्थ एजेंसी SHA पंजाब को भुगतान निपटान एजेंसी बनाया गया है। अस्पतालों के दावे मोर्थ की तय SOP के अनुसार निपटाए जाएंगे और पैसा मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से दिया जाएगा।
दोहराव से बचने के लिए नई व्यवस्था
अगर किसी पीड़ित को आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना जैसी किसी दूसरी सरकारी स्कीम का भी लाभ मिल रहा है, तो भुगतान इस तरह होगा कि एक ही इलाज के दो दावे न हों। निगरानी के लिए राज्य स्तर पर एक डिजिटल डैशबोर्ड बनेगा। इसमें सड़क हादसों, अस्पताल में भर्ती, दावों के निपटारे और फंड के खर्च की पूरी जानकारी दिखेगी।
जिला स्तर पर हर महीने और राज्य स्तर पर हर तीन महीने में समीक्षा बैठक होगी। किसी तरह का विवाद होने पर उसका निपटारा मोर्थ के शिकायत निवारण तंत्र से किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस एकीकरण से फंड और सिस्टम का बेहतर इस्तेमाल होगा और हादसे के बाद गोल्डन आवर में पीड़ितों को बिना पैसे की टेंशन के इलाज मिल सकेगा।












