लखनऊ: अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को अब पारंपरिक तौर-तरीकों से आगे ले जाकर पूरी तरह आधुनिक और तकनीक-आधारित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. हाल ही में दान राशि प्रबंधन में सामने आई विसंगतियों और सुरक्षा कमियों के बाद, मंदिर प्रशासन और उत्तर प्रदेश शासन पूरी रणनीति को बदलने जा रहे हैं. नए सुरक्षा खाके के तहत, मंदिर की सुरक्षा का मुख्य आधार केवल सुरक्षाकर्मी नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिसिस और रियल-टाइम इंटेलिजेंट सर्विलांस सिस्टम होंगे. जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा जा चुका है.
संदिग्ध हरकतों को तुरंत भांपेंगे एआई कैमरे
परिसर की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए वहां पहले से स्थापित सीसीटीवी कैमरों को AI तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा. ये उन्नत कैमरे न केवल सामान्य वीडियो रिकॉर्डिंग करेंगे, बल्कि भीड़ के बीच किसी भी संदिग्ध गतिविधि की पहचान करने, किसी व्यक्ति के असामान्य व्यवहार का विश्लेषण करने और श्रद्धालुओं की संख्या का रियल-टाइम आकलन करने में सक्षम होंगे. किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का आभास होते ही यह सिस्टम सुरक्षा कंट्रोल रूम और तैनात कर्मियों को तत्काल डिजिटल अलर्ट भेजेगा, जिससे त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी.
25 वॉच टावर और स्मार्ट सेंसरों का सुरक्षा चक्र
मंदिर के चारों ओर बनने वाली सुरक्षा दीवार के साथ कुल 25 वॉच टावर स्थापित किए जाने का प्रावधान है. लगभग 4 किलोमीटर लंबी इस बाउंड्रीवॉल का 400 मीटर हिस्सा तैयार हो चुका है, जिसमें 3 वॉच टावर बनाए भी जा चुके हैं. इन टावरों की ऊंचाई 25 से 37 फीट के बीच तय की गई है, जिससे पूरे मंदिर परिसर और उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों पर व्यापक नजर रखी जा सके. इसके साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा उपकरण और संवेदनशील स्मार्ट सेंसर पूरे नेटवर्क की क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे.
चढ़ावा प्रकरण के बाद बदली रणनीति और अफसरों का रोटेशन
सुरक्षा में इस बड़े तकनीकी बदलाव की मुख्य वजह हाल ही में दान गिनती केंद्र में सामने आया कथित चोरी का मामला है. विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट में एक महीने से अधिक की सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद लगभग 70 संदिग्ध घटनाओं का खुलासा हुआ है. जांच में पाया गया कि SOP का उल्लंघन, कमजोर तलाशी व्यवस्था और कैश काउंटिंग के दौरान पर्याप्त निगरानी का अभाव जैसी बड़ी कमियां थीं.
संस्थागत निगरानी प्रभावित हुई
इस प्रकरण से सबक लेते हुए अब अधिकारियों की तैनाती को लेकर भी सख्त नीति बनाई जा रही है. पूर्व में संवेदनशील पदों पर लंबे समय तक एक ही अधिकारी के टिके रहने से संस्थागत निगरानी प्रभावित हुई थी, जिसे देखते हुए अब महत्वपूर्ण सुरक्षा और निगरानी पदों पर नियमित तबादला और जिम्मेदारियों के रोटेशन की नीति लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.
उच्च स्तरीय बैठक में लगेगी मुहर
राममंदिर की सुरक्षा की समीक्षा के लिए हर तीन महीने में एक उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक आयोजित की जाती है. अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आगामी बैठक में इस नए तकनीकी प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी देकर काम को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा. इस बैठक में एडीजी सुरक्षा, एडीजी जोन, IB के निदेशक, और सीआरपीएफ (CRPF) व एसएसएफ (SSF) के कमांडेंट शामिल होंगे. उत्तर प्रदेश सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (SSF) की छठी बटालियन के तहत 1,155 स्थायी पदों के सृजन को मंजूरी दे दी है, जिसमें कमांडेंट से लेकर तकनीकी व प्रशासनिक स्टाफ शामिल हैं.












