अनंत चतुर्दशी 2026: विष्णु जी की पूजा से मिलेगा सुख-समृद्धि का वरदान, जानें अनंत सूत्र बांधने की विधि

0
5
Anant Chaturdashi 2026 Lord Vishnu Rituals
Pinterest

नई दिल्ली: सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी का बहुत बड़ा महत्व है। यह पर्व हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से यह व्रत रखता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इस व्रत की खास बात है कि इस उपवास को महिलाएं और पुरुष दोनों रख सकते हैं।

कब है अनंत चतुर्दशी 2026?

पंचांग के अनुसार इस साल चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और 25 सितंबर की रात 11 बजकर 06 मिनट पर खत्म होगी। उदया तिथि को मानते हुए अनंत चतुर्दशी का व्रत 25 सितंबर, शुक्रवार को रखा जाएगा। इसी दिन अनंत सूत्र बांधा जाएगा।

पूजा की विधि

अनंत चतुर्दशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। पूजा घर को अच्छे से साफ करें और लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। चौकी पर कलश स्थापित करें और भगवान लक्ष्मी-नारायण की मूर्ति रखें। इसके बाद कलश पर अष्टदल बनाकर फूल अर्पित करें और फिर धूप, दीप, रोली, चंदन, फल और फूल से भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें। पूजा में घी का दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है। पूजा के बाद भगवान को भोग लगाएं और अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा सुनें।

14 गांठ वाले अनंत सूत्र का महत्व

बता दें, इस पूजा में अनंत सूत्र का विशेष स्थान है। कुशा या रेशमी धागे में हल्दी-कुमकुम लगाकर 14 गांठें लगाई जाती हैं। इस सूत्र को पहले भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है, फिर पूजा की जाती है। पूजा के बाद मंत्र का जाप करें – ‘अनंत संसार महासमुद्रे मग्नं समभ्युद्धर वासुदेव, अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्यनंतसूत्राय नमो नमस्ते।’ इसके बाद महिलाएं इसे बाएं हाथ में और पुरुष दाएं हाथ में बांधते हैं। मान्यता है कि 14 गांठें 14 लोकों का प्रतीक हैं। अंत में ब्राह्मणों को भोजन कराएं और प्रसाद ग्रहण करें। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here