नई दिल्ली: मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) को लेकर उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. पेपर लीक के बाद आयोजित कराई गई पुनरीक्षा (री-नीट) के नतीजों पर भी अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं. महाराष्ट्र के बीड जिले से एक नया मामला आया है. एक परीक्षार्थी के अंकों और उसकी ओएमआर शीट में भारी अंतर का दावा किया गया है. एनटीए की आधिकारिक आंसर-की के अनुसार उसने 522 अंक हासिल किए हैं. हालांकि, जब फाइनल स्कोरकार्ड जारी हुआ, तो उसमें उसे केवल 95 अंक ही दिए गए. एजेंसी ने चेतावनी दी है कि गलत और भ्रामक दावे करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
उत्तर कुंजी में 522 अंक, स्कोरकार्ड में महज 95
बीड के निवासी परीक्षार्थी सोहम गवते ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा जारी नतीजों में बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगाया है. सोहम का कहना है कि एनटीए की आधिकारिक आंसर-की के अनुसार उसने 522 अंक हासिल किए हैं. हालांकि, जब फाइनल स्कोरकार्ड जारी हुआ, तो उसमें उसे केवल 95 अंक ही दिए गए. छात्र के मुताबिक, इस भारी अंतर को लेकर उसने एनटीए को 7 बार ईमेल भेजे और कई बार फोन पर भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन एजेंसी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला.
बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ में याचिका दायर
एनटीए से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर छात्र ने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया है. अदालत ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया है और मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई तय की है. रि-टेस्ट के नतीजों में अंक घटने या ओएमआर मिसमैच को लेकर अदालत में याचिका दायर किए जाने का यह पहला मामला माना जा रहा है.
‘एडिटेड ओएमआर से किए जा रहे भ्रामक दावे’
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नतीजों में किसी भी तरह की तकनीकी या मूल्यांकन संबंधी गड़बड़ी से साफ इनकार किया है. एजेंसी का कहना है कि 21 जून को दोबारा कराई गई परीक्षा में करीब 20 लाख परीक्षार्थियों में से 11.21 लाख छात्र सफल घोषित हुए हैं. सोशल मीडिया और जनसाधारण में वायरल हो रही शिकायतों पर सफाई देते हुए एनटीए ने कहा है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा एआई और डिजिटल एडिटिंग टूल्स के जरिए फर्जी ओएमआर शीट तैयार की जा रही हैं. एजेंसी ने चेतावनी दी है कि गलत और भ्रामक दावे करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.












