तेल टैंकर पर मिसाइल अटैक से मचा हड़कंप, ऊर्जा सुरक्षा पर नए सवाल

0
10
Tensions flare up again
Tensions flare up again

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर सुर्खियों में है. ओमान के तट के पास गुजर रहे एक तेल टैंकर पर अज्ञात मिसाइल से हमला होने के बाद उसमें आग लग गई. इस घटना ने न सिर्फ खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है,

बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर भी नए खतरे के संकेत दे दिए हैं. राहत की बात यह रही कि इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है, लेकिन हालात को देखते हुए समुद्री एजेंसियां सतर्क हो गई हैं .ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, यह तेल टैंकर ओमान के लिमाह क्षेत्र के पास दक्षिण दिशा की ओर बढ़ रहा था. इसी दौरान जहाज के बाईं ओर से एक अज्ञात प्रक्षेपास्त्र आकर टकराया, जिससे उसमें आग लग गई. घटना के तुरंत बाद जहाज पर मौजूद चालक दल ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की. शुरुआती जानकारी के मुताबिक किसी भी व्यक्ति के घायल होने या समुद्र में तेल फैलने जैसी पर्यावरणीय क्षति की पुष्टि नहीं हुई है. फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है.

जहाजों के लिए जारी की गई चेतावनी

घटना के बाद ब्रिटिश समुद्री अधिकारियों ने इस मार्ग से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है. एजेंसियों ने कहा है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक जहाजों को सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करना चाहिए. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री यातायात पर सीधा असर डाल सकती हैं.

हमले के पीछे ईरान पर आरोप

अमेरिकी अधिकारियों ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सोमवार रात ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में गुजर रहे व्यावसायिक जहाजों पर कम से कम दो मिसाइलें दागीं. बताया जा रहा है कि जिन जहाजों को निशाना बनाया गया, उनमें यह तेल टैंकर भी शामिल था. एक अन्य वाणिज्यिक जहाज को भी नुकसान पहुंचा है. हालांकि दोनों जहाजों के चालक दल सुरक्षित बताए जा रहे हैं और किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है.

युद्धविराम के बाद फिर बढ़ा तनाव

यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों को रोकने के लिए किया गया अस्थायी समझौता हाल ही में समाप्त हुआ है. दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन ताजा हमला यह संकेत देता है कि क्षेत्र में हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका इस हमले के बाद संभावित जवाबी कार्रवाई के विकल्पों पर भी विचार कर सकता है.

बातचीत से नहीं निकला कोई ठोस समाधान

हाल ही में कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता हुई थी. इस बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा और समुद्री मार्गों को लेकर चर्चा हुई, लेकिन किसी बड़े समझौते पर सहमति नहीं बन सकी. विश्लेषकों का कहना है कि इसी वजह से क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है और जहाजरानी कंपनियां लगातार जोखिम का सामना कर रही हैं.

क्यों इतना महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है. अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, इस मार्ग से हर दिन लगभग दो करोड़ बैरल कच्चे तेल का परिवहन होता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा है. यदि इस जलमार्ग में किसी तरह की बाधा आती है, तो उसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, ईंधन की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.

पहले भी बन चुका है संघर्ष का केंद्र

हाल के महीनों में होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का प्रमुख केंद्र बना रहा है. पहले भी जहाजों पर हमले और समुद्री मार्गों में रुकावट की घटनाओं के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था. हालांकि पिछले महीने दोनों पक्षों के बीच समुद्री यातायात को बहाल करने के लिए एक समझौता हुआ था, लेकिन ईरान ने स्पष्ट किया था कि जहाजों को तय सुरक्षा गलियारों का ही इस्तेमाल करना होगा. अब ताजा घटना ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या क्षेत्र में स्थायी शांति संभव हो पाएगी.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here