नई दिल्ली: दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर चर्चा में है। ईरान और अमेरिका के बीच महीनों चले तनाव का असर तेल बाजार के साथ हजारों नाविकों पर भी पड़ा है। हालात ऐसे बने कि सैकड़ों जहाज महीनों तक समुद्र में ही फंसे रहे। अब संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी IMO ने इन नाविकों को सुरक्षित निकालने की बड़ी योजना तैयार की है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला
अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग सेक्टर में भारतीय नाविकों की बड़ी हिस्सेदारी है। दुनिया के व्यापारिक जहाजों पर काम करने वाले हर 6 नाविकों में से 1 भारतीय होता है। ऐसे में होर्मुज संकट का सीधा असर भारतीय नाविकों और उनके परिवारों पर पड़ा है। भारत सरकार पहले ही शिपिंग कंपनियों को संघर्ष वाले इलाकों में भारतीय नाविकों की तैनाती को लेकर सतर्क कर चुकी है।
कितने नाविक फंसे हैं
IMO के मुताबिक करीब 600 जहाज इस संकट से प्रभावित हैं। इनमें तेल टैंकर, कंटेनर और मालवाहक जहाज शामिल हैं। इन जहाजों पर 11,000 से ज्यादा नाविक लंबे समय से समुद्र में फंसे हैं। अब यूएन इन्हें सुरक्षित बाहर निकालने पर काम कर रहा है। IMO प्रमुख आर्सेनियो डोमिंगुएज ने बताया कि इस संघर्ष में 14 नाविकों की मौत हो चुकी है। फंसे नाविकों और जहाजों के लिए बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाने की योजना है।
ईरान के टोल वसूली पर अमेरिका सख्त
आर्सेनियो डोमिंगुएज का बयान उस समय आया जब ईरान के टैंकरों से टोल वसूलने की खबरें सामने आईं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और कोई भी देश यहां से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क नहीं लगा सकता।
नाविकों को निकालने के लिए ईरान, ओमान, अमेरिका और अन्य क्षेत्रीय देशों के सहयोग से सुरक्षित समुद्री गलियारे बनाए जा रहे हैं। IMO का कहना है कि युद्ध और सुरक्षा जोखिमों की वजह से महीनों से जहाजों की आवाजाही रुकी थी, जिसके चलते हजारों नाविक जहाजों पर ही अटके रह गए।
कितने भारतीय नाविक प्रभावित
भारत नाविक उपलब्ध कराने वाले सबसे बड़े देशों में है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में करीब 3.5 लाख भारतीय नाविक जहाजों पर काम करते हैं। बड़ी संख्या विदेशी झंडे वाले जहाजों पर तैनात है। डीजी शिपिंग के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर हर 6 में से 1 नाविक भारतीय है। इस हिसाब से 11 हजार नाविकों में करीब 1800 से 2000 भारतीय हो सकते हैं।
हमलों में गई तीन भारतीयों की जान
पिछले महीनों ओमान की खाड़ी और होर्मुज क्षेत्र में कई जहाजों पर हमले हुए। कुछ घटनाओं में भारतीय नाविकों की मौत भी हुई। इसके बाद डीजी शिपिंग ने भर्ती एजेंसियों और कंपनियों को सलाह दी कि संघर्ष वाले क्षेत्रों में भारतीय नाविकों की तैनाती सीमित रखें। जून में अमेरिकी नौसेना के हमलों में तीन व्यापारिक जहाज निशाना बने। सेटेबेलो जहाज पर तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई, जबकि बाकी दो जहाजों पर कोई मौत नहीं हुई।
















