नई दिल्ली: कॉरपोरेट दुनिया में लोग नौकरी छोड़ने के लिए कई वजहें देते हैं – कम सैलरी, टॉक्सिक बॉस, वर्क-लाइफ बैलेंस खराब होना या बेहतर ऑफर मिलना। लेकिन इस बार एक युवती ने जिस वजह से इस्तीफा दिया, उसने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी है। सिगरेट की बदबू और पैसिव स्मोकिंग से तंग आकर लड़की ने जॉब छोड़ दी और उसका रेजिग्नेशन ईमेल अब वायरल हो रहा है।
जितना हो सका एडजस्ट किया, अब बर्दाश्त नहीं – जाह्नवी का वायरल ईमेल
यह पोस्ट एक्स पर @JanhaviChavada नाम के हैंडल से शेयर की गई है। जाह्नवी छावड़ा ने कंपनी मैनेजमेंट को भेजे अपने ईमेल में बहुत साफ लिखा, “कृपया इस ईमेल को मेरे पद से औपचारिक इस्तीफे के रूप में स्वीकार करें।
कंपनी में मेरा आखिरी दिन 25 अगस्त 2026 होगा। मैं सिगरेट की बदबू बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकती। मैंने जितना हो सका एडजस्ट करने की कोशिश की, लेकिन नहीं कर पाई। वैसे भी बदलना मुझे नहीं, उन्हें चाहिए।”
इतनी सीधी बात ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया। स्क्रीनशॉट को लाखों व्यूज मिल चुके हैं।
पैंट्री और डायनिंग एरिया में स्मोकिंग, मास्क पहनकर भी नहीं मिला आराम
जब यूजर्स ने पूछा कि क्या ऑफिस के अंदर स्मोकिंग होती थी, तो जाह्नवी ने खुलासा किया कि सहकर्मी पैंट्री रूम और डायनिंग एरिया में सिगरेट पीते थे और फिर वहीं से उठकर लॉबी में आकर बैठ जाते थे। इससे पूरे ऑफिस में सिगरेट की गंध फैल जाती थी।
जाह्नवी ने बताया कि बदबू से बचने के लिए उसने मास्क पहनकर काम करने की भी कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। लगातार पैसिव स्मोकिंग से उसकी तबीयत और काम दोनों पर असर पड़ रहा था। आखिर में उसने एडजस्ट करने की जगह जॉब छोड़ना बेहतर समझा।
यूजर्स दो गुटों में बंटे, ज्यादातर बोले – हेल्थ से समझौता मत करो
सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हुई और दो गुटों में बहस शुरू हो गई। ज्यादातर यूजर्स ने जाह्नवी के स्टैंड की तारीफ की। लोगों ने कहा कि पैसिव स्मोकिंग सेहत के लिए एक्टिव स्मोकिंग से भी ज्यादा खतरनाक है और काम की जगह पर साफ हवा पाना हर कर्मचारी का हक है।
कई लोगों ने सवाल उठाया कि नो-स्मोकिंग पॉलिसी होने के बावजूद कॉमन जगहों पर स्मोकिंग कैसे हो रही थी। यह कंपनी की लापरवाही है। वहीं कुछ यूजर्स ने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर नौकरी छोड़ना सही नहीं है, बात करके हल निकाला जा सकता था।
लेकिन ज्यादातर कमेंट जाह्नवी के पक्ष में थे। लोगों ने लिखा कि भारत के कई ऑफिसों में स्मोकिंग जोन या नियमों का पालन ठीक से नहीं होता, जिससे नॉन-स्मोकर्स को रोज परेशानी झेलनी पड़ती है।












