नई दिल्ली: पिछले कुछ महीनों से युद्ध और अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा ईरान भारत के साथ अपने रिश्तों को लेकर लगातार सकारात्मक संकेत दे रहा है. ईरान ने भारत को अपना अहम और पुराना दोस्त बताते हुए दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को रेखांकित किया है. यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की हाल ही में मुलाकात हुई है.
ईरान ने भारत के साथ रिश्तों को बताया अहम
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगेई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के साथ संबंधों पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के रिश्ते केवल कूटनीतिक नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे लंबे समय का ऐतिहासिक और सभ्यतागत जुड़ाव है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग समेत कई क्षेत्रों में बातचीत आगे बढ़ रही है.
BRICS में बढ़ेगी भारत-ईरान बातचीत
नई दिल्ली में होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन भारत और ईरान के लिए रिश्तों को और मजबूत करने का अहम मंच बन सकता है. 11 से 13 सितंबर तक होने वाले इस सम्मेलन में ईरान की भागीदारी तय है. माना जा रहा है कि दोनों देश व्यापार, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत को आगे बढ़ा सकते हैं.
चाबहार पोर्ट पर भी रहेगी नजर
भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दों में से एक है. यह बंदरगाह भारत को मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच बनाने में मदद करता है. भारत ने इस परियोजना में निवेश भी किया है. चाबहार को पाकिस्तान में चीन के सहयोग से विकसित हो रहे ग्वादर पोर्ट के रणनीतिक विकल्प के तौर पर देखा जाता है.
अमेरिका की नजर भी भारत-ईरान रिश्तों पर
भारत और ईरान की बढ़ती नजदीकी अमेरिका के लिए भी महत्वपूर्ण है. अमेरिका ने ईरान पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं और दूसरे देशों से भी उनका पालन करने की अपेक्षा करता है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो पहले ही भारत-ईरान संबंधों को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं.
ऐसे में BRICS से पहले ईरान का भारत को महत्व देना नई दिल्ली और तेहरान के बीच मजबूत होते रिश्तों का संकेत माना जा रहा है. वहीं, इस बढ़ती नजदीकी पर अमेरिका के साथ-साथ पाकिस्तान और चीन की भी नजर बनी रह सकती है.












