नई दिल्ली: अमेरिका के स्वास्थ्य ढांचे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब 9.3 करोड़ डॉलर (लगभग 775 करोड़ रुपये) के एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ। इस पूरे गोरखधंधे का केंद्र बिंदु 46 वर्षीय लैब मालिक खदीर खान मोहम्मद है, जिसे अब अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग (HHS) ने आधिकारिक तौर पर भगोड़ा घोषित कर दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए खदीर अमेरिका से भागकर भारत पहुंच चुका है और आशंका है कि वह तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में कहीं छिपा हुआ है।
FBI की सख्त कार्रवाई
घोटाला सामने आते ही अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग और फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) की संयुक्त टीमों ने जांच तेज कर दी। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से समन्वय बिठाते हुए खदीर के संभावित ठिकानों पर निगरानी रखी जा रही है।
इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने खदीर से जुड़े अलग-अलग बैंक खातों को सीज करते हुए लगभग 60 लाख डॉलर (करीब 50 करोड़ रुपये) की राशि फ्रीज कर ली है।
हैदराबाद में सुराग की तलाश
खदीर ने केवल दस दिनों के भीतर फर्जी दावों के जरिए मेडिकेयर सिस्टम से 1.3 करोड़ डॉलर (लगभग 110 करोड़ रुपये) ऐंठ लिए थे। उसकी लैब ‘अमेरिकन प्रीमियर लैब्स एलएलसी’ ने कुल 9.3 करोड़ डॉलर के फर्जी दावे ठोंके थे, जिनमें से बिना पूरी पड़ताल के 6.5 करोड़ डॉलर (लगभग 540 करोड़ रुपये) का भुगतान भी कर दिया गया था।
डॉक्टरों की पहचान का दुरुपयोग और फर्जी ढांचा
टैक्सस के रिचर्डसन शहर से संचालित ‘अमेरिकन प्रीमियर लैब्स एलएलसी’ के जरिए खदीर ने अगस्त 2023 से अक्टूबर 2024 के बीच लगातार इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। साजिश के तहत उसने कई अमेरिकी डॉक्टरों की व्यक्तिगत पहचान और गोपनीय जानकारी उनकी सहमति के बिना चुराई। इसके बाद उसने उन डॉक्टरों के नाम पर ऐसे मरीजों के जेनेटिक टेस्ट के भारी-भरकम बिल तैयार किए, जिनका उन चिकित्सकों से कोई वास्ता या इलाज का संबंध ही नहीं था।
इन फर्जी टेस्टों को न तो संबंधित डॉक्टरों ने कभी रिकमेंड किया था और ना ही मरीजों की सेहत की देखभाल में इनका कोई इस्तेमाल हुआ था। कागज़ों पर सब कुछ असली दिखाने के लिए उसने एक पूरा फर्जी ढांचा खड़ा किया, जिसके दम पर अमेरिकी सरकार के खजाने से करोड़ों रुपये निकाल लिए गए। फिलहाल अमेरिकी प्रशासन भारतीय एजेंसियों के संपर्क में है ताकि आरोपी को जल्द हिरासत में लिया जा सके।












