नई दिल्ली: चीन में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। परिवार ने बुजुर्ग महिला को मृत मान लिया और शव को ताबूत में रख दिया। लेकिन अचानक ताबूत के अंदर से गुनगुनाने जैसी आवाज आने लगी। ताबूत खोलने पर पता चला कि महिला अभी जिंदा हैं। आंखें भी खुलने लगीं। यह मामला उत्तरी चीन के हेबेई प्रांत का है।
लंबे समय से बीमार थीं महिला
स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार 70 साल से ज्यादा उम्र की महिला कई साल से दिमाग की नस में खून का थक्का जमने की बीमारी से परेशान थीं। उन्हें कैंसर भी था। जब डॉक्टरों ने बताया कि इलाज अब संभव नहीं, तो परिवार उन्हें घर ले आया। वहां उनकी देखभाल हो रही थी। 8 सितंबर को परिवार ने महिला में जिंदगी के कोई साफ संकेत नहीं देखे। उन्हें लगा कि मौत हो चुकी है। कुछ सदस्य बाहर थे, इसलिए सभी के लौटने तक शव सुरक्षित रखने के लिए रेफ्रिजरेटेड ताबूत में रख दिया गया।
ताबूत से आई आवाज
9 सितंबर की शाम महिला की बहू ने ताबूत के अंदर से हल्की गुनगुनाने जैसी आवाज सुनी। परिवार घबरा गया और तुरंत ताबूत खोला। महिला में जीवन के संकेत मौजूद थे। उन्हें बाहर निकाला गया। 11 सितंबर को जब अन्य सदस्य पहुंचे, तो महिला ने आंखें खोलीं और होश आने लगा। लेकिन हालत बहुत गंभीर थी। वे ठीक से खा-पी नहीं पा रही थीं। 11 सितंबर की रात फिर उनकी मौत हो गई। 13 सितंबर को परिवार की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। यानी 8 सितंबर को मृत मानी गई महिला कुछ समय बाद जाग सी गईं, लेकिन दो दिन बाद वास्तव में चल बसीं।
अपैरेंट डेथ हो सकता है कारण
डॉक्टरों के अनुसार यह ‘अपैरेंट डेथ’ की स्थिति हो सकती है। इसमें शरीर की गतिविधियां बेहद धीमी हो जाती हैं। सांस और दिल की धड़कन इतनी कमजोर हो सकती है कि सामान्य तरीके से पहचानना मुश्किल हो। व्यक्ति गहरी बेहोशी या कोमा जैसी हालत में पहुंच सकता है। सिर्फ सांस या धड़कन न दिखने से मौत की पुष्टि नहीं हो जाती। डॉक्टर मेडिकल मानकों से जांच करते हैं। परिवार ने डीप फ्रीजिंग के बजाय रेफ्रिजरेशन का इस्तेमाल किया था ताकि शव ठंडा रहे। कम गतिविधि वाली अवस्था में ठंडा माहौल शरीर की प्रक्रिया को और धीमा कर सकता था।
सोशल मीडिया पर चर्चा
इस घटना ने चीन में खूब चर्चा बटोरी। कुछ लोगों ने कहा कि ताबूत में रखने से पहले अस्पताल से मृत्यु प्रमाणपत्र लेना चाहिए था। कुछ ने पुरानी प्रथाओं का जिक्र किया, जहां अंतिम संस्कार से पहले शव को कुछ समय घर में रखा जाता था।












