नई दिल्ली: आईआईटी बॉम्बे के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में संस्थान ने बड़ा कदम उठाते हुए प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को छुट्टी पर भेज दिया है। इसके साथ ही 22 वर्षीय छात्र की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए 10 सदस्यीय पैनल का गठन भी किया गया है। आईआईटी पलक्कड़ के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रोफेसर रमेश वेंकटेश्वरन की अगुवाई में बना यह पैनल साहिल की मौत की वजहों की पड़ताल करेगा और एक हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
इसी बीच मुंबई क्राइम ब्रांच ने भी प्रोफेसर दूल्ला को पूछताछ के लिए बुलाया है। इससे पहले क्राइम ब्रांच साहिल के माता-पिता के बयान दर्ज कर चुकी है। परिवार की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के बाद यह मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा गया था, जिसमें जाति आधारित उत्पीड़न के आरोप भी शामिल हैं। हालांकि ये आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं और जांच जारी है।
सीसीटीवी फुटेज से जुटाई जा रही जानकारी
जांच एजेंसियां परीक्षा हॉल, कैंपस और हॉस्टल के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही हैं ताकि 18 सितंबर को साहिल की आखिरी गतिविधियों की कड़ी जोड़ी जा सके। सामने आए फुटेज के मुताबिक परीक्षा के दौरान उससे कुछ पूछताछ हुई थी, जिसके बाद वह दोपहर करीब 12:30 से 12:45 बजे के बीच परीक्षा हॉल से बाहर निकला। इसके बाद करीब 1:25 बजे वह अपने हॉस्टल कमरे में पहुंचा, जिसके आगे की गतिविधियों की जांच अभी चल रही है।
गौरतलब है कि आईआईटी बॉम्बे ने पहले साहिल पर मोबाइल इस्तेमाल और चैटजीपीटी पर सवाल अपलोड करने का दावा किया था, जिसके लिए बाद में संस्थान ने माफी मांगी।
परिवार के आरोप और फैकल्टी का पक्ष
साहिल के परिवार का आरोप है कि उसे कैंपस में जातिगत उत्पीड़न और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा। पिता ने प्रोफेसर दूल्ला और संस्थान के निदेशक शिरीष केदारे की गिरफ्तारी की मांग भी की है।
वहीं दूसरी ओर आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष प्रोफेसर राजकुमार एस पंत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जातिगत टिप्पणी का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है और निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जाना चाहिए। फोरम ने यह भी स्पष्ट किया कि दूल्ला को निलंबित नहीं किया गया है, बल्कि सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त रखा गया है।












