नई दिल्ली: हिंदी की एक पुरानी कहावत है कि कमजोर मित्र से बेहतर समझदार दुश्मन होता है। आज यह कहावत सऊदी अरब पर पूरी तरह फिट बैठती दिख रही है। रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्किए जैसे साथियों पर जो भरोसा किया, उसकी कीमत अब उसे चुकानी पड़ रही है, क्योंकि एक के बाद एक मिसाइल हमले उसके शहरों पर गिर रहे हैं।
यमन में ईरान समर्थित हूती गुट और सऊदी समर्थित हादी गुट के बीच लंबे समय से जंग चल रही है। जब इसकी आंच सऊदी अरब तक पहुंचने लगी, तो 5 अक्टूबर को जल्दबाजी में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के गठबंधन यानी “इस्लामिक नाटो” या मक्का पैक्ट को सक्रिय कर दिया गया। 7 अक्टूबर को पाकिस्तानी फौज और उसका जंगी सामान सऊदी अरब पहुंच गया, लेकिन हूती लड़ाकों ने ठीक उसी वक्त सऊदी अरब पर हमला बोल दिया।
एयरपोर्ट और सैन्य अड्डे बने निशाना
इस हमले में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया। हूतियों के निशाने पर सऊदी अरब के एयरपोर्ट और सैन्य अड्डे थे। कुल 6 एयरपोर्ट और मिलिट्री बेस पर मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से दो अपने निशाने पर जा लगीं। इस हमले में 3 लोगों की मौत हुई और 36 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने सऊदी अरब में करीब 15 हजार सैनिक, 10 फाइटर जेट और चीन में बना हवाई रक्षा सिस्टम तैनात कर रखा है। इसके बावजूद सऊदी शहरों पर मिसाइलें बरस रही हैं, जो इस गठबंधन की असली ताकत पर सवाल खड़े करता है। लेख का तर्क है कि इसके लिए पाकिस्तान से ज्यादा सऊदी अरब की अपनी चूक जिम्मेदार है, क्योंकि मिडिल ईस्ट में पाकिस्तानी फौज की नाकामियों का पुराना इतिहास रहा है।
1960 के दशक से चला आ रहा है रिकॉर्ड
इस इतिहास की शुरुआत 1960 के दशक से मानी गई है, जब सऊदी अरब और यमन की जंग में पाकिस्तानी वायुसेना मदद के लिए पहुंची थी, लेकिन सऊदी अरब अपने सैन्य लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया। साल 1970 में जॉर्डन के राजा ने फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन को खत्म करने के लिए पाकिस्तानी सेना को बुलाया था, जिस अभियान में 10 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनियों के मारे जाने का दावा किया गया है। 1967 के अरब-इजरायल युद्ध में भी पाकिस्तानी पायलट शामिल थे, लेकिन जीत इजरायल की हुई। 2017 में पाकिस्तान के पूर्व सेनाध्यक्ष राहिल शरीफ ने यमन में हूतियों के खिलाफ सऊदी सैनिकों की कमान संभाली, पर वह मिशन भी नाकाम रहा।
पाकिस्तान में रोटी भी हुई महंगी
इधर पाकिस्तान की आम जनता भी अपनी ही हालत से परेशान है। वहां अब तक टमाटर और प्याज महंगे होने की खबरें आती थीं, लेकिन अब रोटी भी महंगी हो गई है। सामान्य आटे का भाव 165 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जिसके चलते बड़े शहरों में एक रोटी की कीमत 20 रुपये हो गई है। पाकिस्तानी मीडिया और वहां के लोग खुद इस बदहाली की तस्वीर बयां कर रहे हैं।












