चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी की बढ़ी चिंता, ट्रंप की लोकप्रियता में भारी गिरावट

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नई दिल्ली: मध्यावधि चुनाव से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बुरी खबर आई है। रॉयटर्स और इप्सोस के ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक सिर्फ 31 फीसदी अमेरिकी ही उनके कामकाज से संतुष्ट हैं। यह उनके दोनों कार्यकालों में अब तक का सबसे निचला स्तर है। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले चुनाव से पहले इन आंकड़ों ने रिपब्लिकन पार्टी की चिंता बढ़ा दी है।

सर्वेक्षण में कांग्रेस के चुनाव के लिहाज से डेमोक्रेटिक पार्टी को रिपब्लिकन पार्टी पर 12 अंकों की बढ़त मिली है। ट्रंप की लोकप्रियता दो सप्ताह पहले के मुकाबले एक प्रतिशत अंक और गिर गई है। अगर आज कांग्रेस के चुनाव हों, तो 47 फीसदी पंजीकृत मतदाता डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट देने की बात कह रहे हैं, जबकि रिपब्लिकन के पक्ष में केवल 35 फीसदी हैं। इन नतीजों से डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत पाने की उम्मीद मजबूत हुई है। अगर रिपब्लिकन पार्टी किसी एक सदन का नियंत्रण भी गंवा देती है, तो ट्रंप के लिए अपना एजेंडा आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।

महिला मतदाताओं का रुझान

रिपब्लिकन उम्मीदवारों के घटते समर्थन की एक बड़ी वजह महिला मतदाताओं का रुझान रहा। करीब 50 फीसदी महिलाओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट देने की बात कही, जबकि 32 फीसदी ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को पसंद किया। इस तरह महिलाओं में डेमोक्रेट को 18 अंकों की बढ़त है। पुरुष मतदाताओं के बीच भी डेमोक्रेटिक पार्टी आगे रही।

आंकड़ों पर एक नजर

सर्वेक्षण के मुताबिक, 31 फीसदी अमेरिकी ट्रंप के कामकाज से संतुष्ट हैं, जबकि 69 फीसदी असंतुष्ट हैं। 68 फीसदी लोग उनकी आर्थिक नीतियों से नाखुश हैं। पिछले सर्वेक्षण में डेमोक्रेट को 44 और रिपब्लिकन को 37 फीसदी का समर्थन मिला था, जो अब बदलकर 47 और 35 फीसदी हो गया है।

ईरान युद्ध और महंगे पेट्रोल का असर

ट्रंप की लोकप्रियता गिरने की प्रमुख वजह ईरान युद्ध और बढ़ती ईंधन कीमतों को माना जा रहा है। ट्रंप ने फरवरी में इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर सैन्य हमले का आदेश दिया था। इसके बाद युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतों में तेजी आई।

मध्यावधि चुनाव में प्रतिनिधि सभा और सीनेट की सीटों पर मतदान होगा। डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने की कोशिश में है। अगर ऐसा हुआ, तो कार्यकाल के बाकी दो वर्षों में ट्रंप के लिए नीतियां और विधायी एजेंडा लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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