नई दिल्ली: अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने को लेकर ईरान ने अपना रुख साफ कर दिया है। तेहरान का कहना है कि बातचीत तभी होगी, जब वॉशिंगटन उसकी सभी शर्तें पूरी करने की दिशा में कदम उठाएगा। यह संदेश ऐसे वक्त आया है, जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर मध्यस्थता की कोशिशों के तहत ईरान के दौरे पर हैं।
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने X पर लिखा कि यूरेनियम का एक भी ग्राम ईरान से बाहर नहीं भेजा जाएगा। उनके मुताबिक, अमेरिका जब तक विश्वास बहाली के लिए कदम नहीं उठाता, बातचीत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया की शुरुआत ईरान की सभी शर्तों को पूरी तरह मानने से होनी चाहिए। यही रुख उन्होंने मुनीर के साथ बैठक में भी दोहराया। ईरानी मीडिया के अनुसार, मंगलवार को राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने तेहरान में मुनीर से क्षेत्रीय घटनाक्रम और मध्यस्थता पर चर्चा की। नूरन्यूज के मुताबिक, मुनीर ने ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कलीबाफ से भी मुलाकात की।
ईरान की सात शर्तें
कलीबाफ ने कहा कि अमेरिका तब तक ईरान का भरोसा नहीं जीत सकता, जब तक वह पिछले महीने रखी गई सात शर्तें पूरी नहीं करता। ये शर्तें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने से जुड़ी हैं। इनमें ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी खत्म करना, तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाना और क्षेत्र के सभी मोर्चों पर दुश्मनी रोकना शामिल है। रेजाई ने यह भी कहा कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के रुख के अनुसार, हथियार बनाने के स्तर के करीब पहुंच चुके यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजा जाएगा।
परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ी अड़चन
ईरान का परमाणु कार्यक्रम किसी भी संभावित समझौते में सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि आठ महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए ईरान को यूरेनियम संवर्धन क्षमता में “महत्वपूर्ण” कमी करनी होगी।
अमेरिका, इजरायल और कई पश्चिमी देश ईरान पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश का आरोप लगाते रहे हैं। वजह है कि ईरान यूरेनियम को 60 प्रतिशत तक संवर्धित करता है, जो आम नागरिक इस्तेमाल से काफी ज्यादा और लगभग 90 प्रतिशत वाले हथियार-ग्रेड स्तर के करीब है। हालांकि ईरान हथियार बनाने की कोशिश से इनकार करता है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता
पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की अहम भूमिका निभा रहा है। उसकी कोशिशों से जून में अंतरिम शांति समझौता हुआ था, लेकिन कुछ हफ्तों बाद लड़ाई फिर शुरू होने से वह टूट गया। मुनीर की मौजूदा ईरान यात्रा मतभेद कम करने की उन्हीं कोशिशों की अगली कड़ी है।












