नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को साफ कहा कि अगर विपक्ष की ओर से सीईसी के खिलाफ कोई नया प्रस्ताव आता है तो उस पर नियमों के तहत जांच की जाएगी।दरअसल, विपक्ष लगातार वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में गड़बड़ी का आरोप लगा रहा है और इसी को आधार बनाकर सीईसी को हटाने की मांग कर रहा है। इसी बीच अध्यक्ष का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है।
दो बार खारिज हो चुका है प्रस्ताव
विपक्ष इससे पहले भी ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए दो बार कोशिश कर चुका है। पहली बार लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्ष का नोटिस खारिज हो गया था, जबकि दूसरी बार दिया गया नोटिस अभी भी राज्यसभा में लंबित है। पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि क्या तीसरी बार भी ऐसा कोई प्रस्ताव आ सकता है, तो बिरला ने कहा कि जो भी नोटिस आएगा, संसदीय प्रक्रिया और नियमों के अनुसार ही उस पर फैसला होगा।
पिछले दो हफ्तों में सीईसी के खिलाफ विपक्ष का विरोध और तेज हो गया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल मतदाता सूची में धांधली का आरोप लगाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
14 फैसलों पर चुनाव आयुक्तों की आपत्ति
इस पूरे विवाद को उस रिपोर्ट ने और हवा दे दी है जिसमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर से जुड़े 14 फैसलों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। दोनों आयुक्तों का कहना था कि कई अहम आदेश उनकी जानकारी और सहमति के बिना ही जारी कर दिए गए।
इसके बाद से चुनाव आयोग के अंदरूनी कामकाज और एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता नहीं बरती गई और आयोग एकतरफा फैसले ले रहा है।












