नई दिल्ली: दिवाली से पहले बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है। सोने-चांदी की दुकानों से लेकर बर्तन बाजार तक भीड़ दिखने लगी है। पांच दिवसीय दोपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है और इस दिन खरीदारी को बेहद शुभ माना जाता है। लेकिन इस बार तारीख को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन है। कोई 6 नवंबर बता रहा है तो कोई 7 नवंबर। तो चलिए पंचांग के हिसाब से सही तारीख साफ कर देते हैं।
कब है धनतेरस?
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर की सुबह 9 बजकर 30 मिनट से शुरू होगी और 7 नवंबर की सुबह 11 बजकर 45 मिनट तक रहेगी। चूंकि धनतेरस का पर्व प्रदोष काल में मनाया जाता है, इसलिए यह 6 नवंबर, शुक्रवार को ही मनाया जाएगा। इस दिन शाम 5 बजकर 49 मिनट से रात 8 बजकर 23 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। इसी दौरान भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की पूजा करना फलदायी होगा।
खरीदारी के 3 सबसे शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर इस बार खरीदारी के लिए तीन खास मुहूर्त बन रहे हैं। पहला मुहूर्त सुबह का है। चौघड़िया के अनुसार सुबह 8:16 बजे से 9:48 बजे तक आप सोना, चांदी या बर्तन खरीद सकते हैं। दूसरा मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त है, जो दिन में 11:48 बजे से दोपहर 12:56 बजे तक रहेगा। यह भी खरीदारी के लिए बहुत शुभ माना जाता है। तीसरा और सबसे अहम मुहूर्त शाम का है। शाम 6:02 बजे से रात 7:58 बजे तक वृषभ काल रहेगा। मान्यता है कि इस समय की गई खरीदारी साल भर समृद्धि लाती है।
क्यों मनाते हैं धनतेरस?
मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक त्रयोदशी के दिन ही भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें देवताओं का वैद्य कहा जाता है, इसलिए इस दिन आरोग्य के लिए उनकी पूजा की जाती है। साथ ही धन के देवता कुबेर की पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है।
पूजा विधि
शाम को उत्तर दिशा में कुबेर और धन्वंतरि जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। घी का एकमुखी दीया जलाएं। कुबेर जी को सफेद मिठाई और धन्वंतरि जी को पीली मिठाई का भोग लगाएं। फिर ‘ॐ ह्रीं कुबेराय नमः’ मंत्र का जाप करें और धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ करें। पूजा के बाद प्रसाद बांटें और दिवाली पर कुबेर जी को तिजोरी में स्थापित करें।











