इजरायल की सत्ता का समीकरण बदला, नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट; आइजेनकोट को मिला अरब दलों का साथ

0
7

इजरायल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। प्रधानमंत्री पद की दौड़ में विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट को अब ऐसे राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है, जिनके रुख को लेकर पहले कई सवाल उठते रहे थे। अरब समुदाय से जुड़े दो प्रमुख राजनीतिक समूहों ने उनके पक्ष में खड़े होने का फैसला किया है। इस घटनाक्रम ने संसद में बहुमत का गणित आइजेनकोट के पक्ष में कर दिया है। दूसरी तरफ बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन पिछड़ता नजर आ रहा है। चुनाव के बाद सत्ता गठन की प्रक्रिया में यह समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है। हालांकि अंतिम फैसला राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग की भूमिका और सरकार बनाने के लिए मिलने वाले औपचारिक आमंत्रण पर निर्भर करेगा।

67 सांसदों के समर्थन का दावा

इजरायल के अरब राजनीतिक दलों के गठबंधन ‘जॉइंट लिस्ट’ और अरब नेतृत्व वाली ‘राआम’ पार्टी ने गादी आइजेनकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन देने की घोषणा की है। ‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ की रिपोर्ट के अनुसार, जॉइंट लिस्ट ने गुरुवार को अपना रुख स्पष्ट किया। गठबंधन ने कहा है कि वह राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग को औपचारिक रूप से आइजेनकोट का नाम सुझाएगा। दूसरी ओर राआम पार्टी के आठ सांसद पहले ही उनके समर्थन की प्रतिबद्धता जता चुके हैं।

इस समर्थन के बाद आइजेनकोट के पक्ष में 120 सदस्यीय नेसेट यानी इजरायली संसद के 67 सदस्यों का समर्थन जुटने की संभावना है। सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत के लिहाज से यह संख्या महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नेतन्याहू का गठबंधन पीछे छूटा

चुनावी गणित में नेतन्याहू के नेतृत्व वाला खेमा फिलहाल कमजोर स्थिति में दिखाई दे रहा है। उनकी लिकुड पार्टी के गठबंधन के पास 58 सीटें बताई गई हैं, जबकि आइजेनकोट को 67 सांसदों का समर्थन मिलने की संभावना है।

इस समीकरण में जॉइंट लिस्ट के 11 सदस्य और राआम के आठ सांसद अहम भूमिका निभा रहे हैं। पिछले सप्ताह हुए आम चुनाव में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने कुल 19 सीटें जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया था। हालांकि नेतन्याहू के समर्थक खेमे के सभी सहयोगी दल एकजुट रहेंगे या नहीं, इसे लेकर भी सवाल हैं। यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म के पास सात सीटें हैं। इनमें से चार सीटों पर देगेल हातोराह का नियंत्रण है। इस दल ने संकेत दिया है कि वह किसी भी उम्मीदवार के नाम की सिफारिश नहीं करेगा।

राष्ट्रपति के पास जाएगा समर्थन का प्रस्ताव

जॉइंट लिस्ट ने बताया है कि उसके प्रतिनिधि गुरुवार शाम राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग को अपने फैसले की जानकारी देंगे। इसके साथ ही राष्ट्रपति से अनुरोध किया जाएगा कि सरकार बनाने की जिम्मेदारी आइजेनकोट को सौंपी जाए। इजरायल की व्यवस्था में राष्ट्रपति विभिन्न दलों से सलाह लेने के बाद उस नेता को सरकार बनाने का अवसर देते हैं, जिसके पास संसद में बहुमत जुटाने की बेहतर संभावना हो। इसलिए मौजूदा समर्थन आइजेनकोट के लिए महत्वपूर्ण बढ़त माना जा रहा है।

अरब दलों को लेकर पहले अलग था आइजेनकोट का रुख

इस पूरे घटनाक्रम का दिलचस्प पहलू यह है कि आइजेनकोट पहले अरब दलों को अपनी सरकार में शामिल करने के पक्ष में नहीं दिखाई दिए थे। 26 सितंबर को चैनल 12 को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि राआम उनकी अगली सरकार का हिस्सा नहीं बनेगी। उस समय उनका तर्क था कि कोई भी अरब या अति-रूढ़िवादी धार्मिक दल उनकी तय शर्तों पर खरा नहीं उतर रहा है। उन्होंने राआम के नेता मंसूर अब्बास का भी उल्लेख किया था।

अब चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरण में उन्हीं दलों का समर्थन उनके लिए सरकार बनाने का रास्ता आसान करता दिख रहा है। आने वाले दिनों में राष्ट्रपति का फैसला और गठबंधन की औपचारिक बातचीत तय करेगी कि इजरायल की अगली सरकार किसके नेतृत्व में बनेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here