अमेरिकी शेयर बाजार में ऐतिहासिक गिरावट, निवेशकों के 2.3 ट्रिलियन डॉलर डूबे; ट्रंप ने डेमोक्रेट्स को घेरा

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अमेरिका के शेयर बाजार में गुरुवार को ऐसा भूचाल आया कि दुनिया भर के निवेशकों की निगाहें वॉल स्ट्रीट पर टिक गईं। कारोबार शुरू होने के कुछ ही समय बाद बिकवाली तेज हो गई और दिन समाप्त होते-होते प्रमुख सूचकांक भारी नुकसान के साथ बंद हुए। इस गिरावट का सबसे बड़ा असर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों पर पड़ा, जिनके शेयरों ने पिछले कई महीनों में बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया था। एनवीडिया जैसी दिग्गज चिप निर्माता कंपनी के शेयर भी इस दबाव से बच नहीं सके। नैस्डैक 100 में छह प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और निवेशकों की कुल 2.3 ट्रिलियन डॉलर की बाजार संपत्ति घट गई।

प्रमुख शेयर सूचकांकों में बड़ी गिरावट

गुरुवार को अमेरिकी बाजार के लगभग सभी प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। तकनीकी कंपनियों पर केंद्रित नैस्डैक में करीब छह प्रतिशत की गिरावट आई। एसएंडपी 500 लगभग चार प्रतिशत नीचे आ गया, जबकि डाउ जोंस में तीन प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। पिछले कुछ समय से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कारोबार निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। बड़ी टेक कंपनियां चिप, सर्वर और कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं।

इसी उम्मीद में निवेशकों ने इन कंपनियों के शेयरों में बड़ी रकम लगाई। लेकिन अब बाजार में यह चिंता बढ़ रही है कि AI पर किया जा रहा भारी खर्च भविष्य में उतना लाभ दे भी पाएगा या नहीं, जितनी उम्मीद की जा रही है।

डेटा सेंटरों को लेकर बढ़ रहा विरोध

AI तकनीक के संचालन के लिए बड़े डेटा सेंटरों की जरूरत होती है। इन केंद्रों में भारी मात्रा में बिजली और पानी की खपत होती है। अमेरिका के कई क्षेत्रों में इनके निर्माण को लेकर स्थानीय नागरिकों की नाराजगी बढ़ रही है।

लोगों को आशंका है कि डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली मांग का बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। पानी की खपत को लेकर भी पर्यावरण संबंधी चिंताएं सामने आ रही हैं। निवेशकों को डर है कि सरकारें इन परियोजनाओं पर नए प्रतिबंध या कड़े नियम लागू कर सकती हैं। इससे AI कंपनियों की विस्तार योजनाओं और भविष्य की कमाई पर असर पड़ सकता है।

डेमोक्रेटिक जीत को भी बताया जा रहा वजह

अमेरिकी कांग्रेस के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की सफलता के बाद निवेशकों के बीच नीतिगत बदलाव की आशंका बढ़ी है। बाजार के कुछ जानकारों का मानना है कि नई राजनीतिक परिस्थितियों में तकनीकी कंपनियों पर निगरानी और सरकारी नियंत्रण बढ़ सकता है।

शुरुआत में चुनावी नतीजों के बाद बाजार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई थी, लेकिन गुरुवार को निवेशकों का रुख बदल गया। AI डेटा सेंटरों के खिलाफ विरोध और संभावित सरकारी सख्ती की आशंकाओं ने बिकवाली को बढ़ावा दिया।

ट्रंप ने चुनावी नतीजों को ठहराया जिम्मेदार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शेयर बाजार की गिरावट पर प्रतिक्रिया देते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी को निशाने पर लिया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि चुनावी परिणामों के कारण बाजार को इतिहास के सबसे खराब दिनों में से एक का सामना करना पड़ा है। पेंडरफंड कैपिटल मैनेजमेंट के मुख्य निवेश अधिकारी ग्रेग टेलर ने मौजूदा गिरावट की तुलना 2008 के आवास संकट और 2001 के इंटरनेट बबल से की। उनका कहना है कि बाजार में AI का प्रभाव बहुत अधिक बढ़ गया था और अब इसी क्षेत्र में कमजोरी का असर पूरे बाजार पर दिखाई दे रहा है। बाजार की घबराहट मापने वाला VIX इंडेक्स 11.57 अंक बढ़कर 28.18 पर पहुंच गया।

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