नई दिल्ली। जिस बस्तर की पहचान कभी नक्सली हिंसा, बारूदी सुरंगों और सुरक्षा बलों पर होने वाले हमलों से जुड़ी रही थी, वहां इस बार दीपावली का त्योहार एक अलग संदेश लेकर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर स्थित करनपुर सीआरपीएफ कैंप पहुंचकर देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के साथ दीपावली मनाई। इस अवसर पर उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में सुरक्षा बलों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि देश ने दशकों से चली आ रही नक्सली हिंसा के खिलाफ निर्णायक सफलता हासिल की है। प्रधानमंत्री ने इसे देश के लिए असाधारण उपलब्धि बताते हुए कहा कि करोड़ों लोगों के जीवन से वामपंथी उग्रवाद का भय समाप्त हुआ है।
नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में आया बड़ा बदलाव
जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार की दीपावली इसलिए विशेष है, क्योंकि देश लंबे समय से चली आ रही नक्सलवाद और माओवादी आतंक की चुनौती से बाहर निकलने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल कर चुका है। उन्होंने कहा कि पहली बार देश का कोई भी जिला नक्सलवाद से प्रभावित नहीं है। यह बदलाव केवल सुरक्षा व्यवस्था की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन करोड़ों नागरिकों के लिए भी राहत का विषय है, जो वर्षों तक हिंसा और डर के माहौल में जीवन बिताने को मजबूर थे।
कभी 230 से अधिक जिले थे नक्सल प्रभावित
प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के पुराने प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय देश के करीब 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले इस समस्या से प्रभावित थे। बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के बड़े हिस्से में नक्सली गतिविधियों ने विकास की रफ्तार को प्रभावित किया था।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2013 के बीच हालात इतने गंभीर थे कि हर साल नक्सलियों के मुकाबले सुरक्षा बलों के अधिक जवान शहीद होते थे। उस समय की सरकारों ने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया और इसे ऐसी बीमारी मान लिया था, जिसका इलाज संभव नहीं है।
47 साल में पहली बार सीआरपीएफ को बड़ी उपलब्धि
प्रधानमंत्री ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 12 महीनों में ड्यूटी के दौरान किसी भी सीआरपीएफ जवान की जान नहीं गई। उनके अनुसार, 47 वर्षों में यह पहली बार हुआ है। उन्होंने इसे सरकार की स्पष्ट रणनीति, सुरक्षा बलों की मजबूत तैयारी और दृढ़ संकल्प का परिणाम बताया। सीआरपीएफ ने भी लगातार 12 महीनों तक ऑपरेशनल मौतों का आंकड़ा शून्य रहने को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।
सुरक्षा बलों के त्याग और बलिदान को किया नमन
मोदी ने कहा कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों के जवानों ने अनगिनत कुर्बानियां दी हैं। उन्होंने सीआरपीएफ, कोबरा, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, आईआरबी, राज्य पुलिस बलों, बस्तर फाइटर्स और विशेष बलों के जवानों के योगदान की सराहना की। महिला कमांडो के साहस और सेवाभाव का भी विशेष रूप से उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन जवानों की निष्ठा और समर्पण के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हालात बदलने लगे हैं। सरकार ने सेवा और विकास की भावना के साथ इन इलाकों में लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे लोग भी अब सरकार और सुरक्षा बलों के प्रयासों का समर्थन करने के लिए आगे आ रहे हैं।
राष्ट्र प्रथम की भावना से विकास को मिली गति
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब देश राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ता है, तो शांति और सुरक्षा का वातावरण बनता है और विकास के नए रास्ते खुलते हैं। उन्होंने पिछले 12 वर्षों के दौरान नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ मिली सफलता के साथ गरीबी उन्मूलन के प्रयासों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, करीब 50 करोड़ लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है।
मोदी ने कहा कि सुरक्षा और विकास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जहां हिंसा समाप्त होती है, वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ती हैं। बस्तर में जवानों के साथ दीपावली मनाकर प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों के त्याग को सम्मान देने के साथ क्षेत्र में बदलते हालात का संदेश भी दिया।












