नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के बीच चीन और ईरान के रक्षा संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अटकलें तेज हो गई हैं. चीनी मीडिया द्वारा अमेरिकी नौसैनिक जहाजों के ईरानी मिसाइलों से क्षतिग्रस्त होने के दावों के बाद हथियारों की आपूर्ति पर सवाल उठे. हालांकि, बीजिंग ने तेहरान के साथ सीएम-302 सुपरसोनिक मिसाइल सौदे की खबरों को पूरी तरह नकार दिया है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा और तनाव अपने चरम पर है.
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने स्पष्ट किया कि मिसाइल सौदे की बातें केवल एक दुष्प्रचार अभियान का हिस्सा हैं. उन्होंने कहा कि चीन एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में हमेशा अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करता है. चीन ऐसी किसी भी खबर का विरोध करता है जो क्षेत्र में तनाव को और अधिक बढ़ाने का काम करे या गलत तथ्यों को फैलाने का प्रयास करे.
अमेरिकी बेड़े और सुरक्षा चुनौतियां
वर्तमान अभियान के तहत अमेरिका ने ईरानी जलक्षेत्र के पास विमान वाहक पोतों सहित एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा तैनात किया है. यदि ईरान के पास उन्नत चीनी मिसाइलें होतीं, तो ये अमेरिकी बेड़े आसान निशाना बन सकते थे. हालांकि, चीन ने तेहरान के साथ अपने घनिष्ठ आर्थिक संबंधों के बावजूद इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक काफी संतुलित और सधी हुई प्रतिक्रिया दी है.
उन्नत सैन्य हार्डवेयर का महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीएम-302 मिसाइलें ईरान को मिली होतीं, तो यह चीन द्वारा तेहरान को हस्तांतरित किया गया अब तक का सबसे आधुनिक हथियार होता. ये सुपरसोनिक मिसाइलें अपनी गति के कारण नौसैनिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती मानी जाती हैं. फिलहाल बीजिंग इसे एक सोची-समझी साजिश बता रहा है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में चीन की भूमिका को विवादित बनाना है.
संप्रभुता और शांति की प्राथमिकता
माओ निंग ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल प्रयोग और किसी भी देश की संप्रभुता के उल्लंघन का कड़ा विरोध किया है. चीन का रुख स्पष्ट है कि वह शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम करने को तैयार है. बीजिंग चाहता है कि मध्य पूर्व के मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाया जाए ताकि आगे किसी भी बड़े संघर्ष को टाला जा सके.
भविष्य की कूटनीतिक दिशा
अयातुल्ला खामेनेई की हत्या के बाद ईरान के नए नेतृत्व के साथ चीन के संबंध किस दिशा में जाएंगे, यह देखना महत्वपूर्ण है. ईरान चीन के लिए तेल का एक बड़ा स्रोत है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक हित जुड़े हैं. साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की आगामी बीजिंग यात्रा को लेकर भी बातचीत जारी है. चीन फिलहाल हर कदम बहुत सोच-समझकर और सतर्कता के साथ उठा रहा है.
















