1 लाख महीना कमाने वालों को भी क्यों पड़ रही है पैसों की कमी? वायरल पोस्ट ने खोली पोल

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Why is even a salary of 1 lakh rupees insufficient for salaried individuals? A viral post reveals th
Why is even a salary of 1 lakh rupees insufficient for salaried individuals? A viral post reveals th

नई दिल्ली: एक समय था जब 1 लाख रुपये की मंथली सैलरी को आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति का प्रतीक माना जाता था. लेकिन आज महानगरों में बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों ने इस धारणा को काफी हद तक बदल दिया है. बता दें, सोशल मीडिया पर इन दिनों एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें उन्होंने बताया है कि आखिर क्यों 1 लाख रुपये की इनकम होने के बावजूद भी महीने के अंत तक कई लोगों के लिए बचत करना मुश्किल हो जाता है. 

मंथली बजट किया शेयर 

गुरुग्राम की चार्टर्ड अकाउंटेंट मुस्कान मित्तल ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में एक मंथली बजट शेयर किया है. उनके अनुसार, अगर कोई व्यक्ति बड़े शहर में रहकर अपनी वर्तमान जरूरतों के साथ-साथ भविष्य की वित्तीय सुरक्षा का भी ध्यान रखता है, तो उसकी पूरी सैलरी लगभग तय खर्चों में ही खत्म हो जाती है.

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि लगभग 25 हजार रुपये घर के किराए, 10 हजार रुपये राशन और भोजन, 5 हजार रुपये यात्रा, 3 हजार रुपये बिजली, इंटरनेट और मोबाइल बिल पर खर्च हो सकते हैं. इसके अलावा शॉपिंग और पर्सनल केयर पर करीब 5 हजार रुपये, बाहर घूमने और रेस्टोरेंट पर 5 हजार रुपये, मेडिकल और इंश्योरेंस के लिए 7 हजार रुपये तथा परिवार और बाकी जरूरी खर्चों के लिए लगभग 5 हजार रुपये अलग रखने पड़ते हैं.

1 लाख रुपये कैसे हो जाते है खर्च 

मुस्कान ने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति भविष्य को सुरक्षित करने के लिए हर महीने 20 हजार रुपये एसआईपी (SIP) में निवेश करता है और 15 हजार रुपये इमरजेंसी फंड के लिए बचाता है, तो कुल खर्च 1 लाख रुपये तक पहुंच जाता है. ऐसे में महीने के अंत में अतिरिक्त खर्च के लिए लगभग कोई राशि नहीं बचती.

उनका कहना है कि बजट बनाना केवल खर्चों में कटौती करना नहीं है, बल्कि वर्तमान जरूरतों को पूरा करते हुए भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है. इतना ही नहीं नियमित निवेश और आपातकालीन बचत लंबे समय के लिए आपको फाइनेंसियल स्टेबिलिटी देता है. 

लोगों ने शेयर की अपनी राय 

यही वजह है की अब यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इस पर अपनी राय भी शेयर कर रहे हैं. खासकर दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में रहने वाले कई यूजर्स का कहना है कि वास्तविक खर्च इस अनुमान से भी अधिक हो सकता है. कुछ लोगों ने यह भी लिखा कि गुरुग्राम जैसे शहर में 25 हजार रुपये में अच्छा किराये का घर मिलना अब आसान नहीं रहा यही वजह है कि बढ़ती महंगाई के बीच अच्छी सैलरी होने के बावजूद बचत करना आज कई नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.

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