नई दिल्ली: सावन का हर सोमवार भगवान शिव की पूजा के लिए खास माना जाता है, लेकिन इस बार 17 अगस्त 2026 को बनने वाला संयोग और भी विशेष है. सावन के तीसरे सोमवार के साथ नाग पंचमी का पर्व पड़ रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शिवलिंग पर एक खास फूल चढ़ाने से भोलेनाथ की कृपा मिलती है और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है.
साल 2023 के बाद इस बार फिर सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी का संयोग बन रहा है. 17 अगस्त को यह पर्व मनाया जाएगा. इस दिन शुभ और शुक्ल योग भी बन रहे हैं, जिससे पूजा-पाठ का महत्व और बढ़ जाता है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने और विधि-विधान से पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है.
शिवलिंग पर चढ़ाएं नीले रंग का अपराजिता फूल
धार्मिक ग्रंथों में सावन सोमवार और नाग पंचमी के संयोग में शिवलिंग पर नीले रंग का अपराजिता फूल अर्पित करने का उल्लेख मिलता है. इसे नील पुष्प भी कहा जाता है. मान्यता है कि इसे भगवान शिव को चढ़ाने से धन-धान्य और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है. ऐसा भी माना जाता है कि अपराजिता का यह फूल घर में लाने और पूजा में इस्तेमाल करने से आर्थिक परेशानियां कम होती हैं. भगवान शिव को यह पुष्प अर्पित करने से कर्ज से राहत और जीवन में वैभव आने की मान्यता है.
नाग पंचमी पर पूजा और जलाभिषेक का शुभ समय
17 अगस्त को शिव पूजा और जलाभिषेक के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:28 बजे से 6:07 बजे तक रहेगा. वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 1:26 बजे से 2:23 बजे तक है. विजय मुहूर्त शाम 4:17 बजे से 5:14 बजे तक रहेगा, जबकि अमृत काल शाम 6:46 बजे से रात 8:27 बजे तक रहेगा.
नाग पंचमी मनाने की धार्मिक मान्यता
नाग पंचमी सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है. मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से परिवार की रक्षा होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है. पौराणिक कथा के अनुसार, राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डसने से हुई थी. उनके पुत्र जन्मेजय ने नागों से बदला लेने के लिए सर्प यज्ञ कराया. यज्ञ में नागों के भस्म होने का सिलसिला शुरू हुआ तो ऋषि आस्तिक ने पहुंचकर यज्ञ रुकवाया और नागों की रक्षा की. इसी घटना से नाग पूजा की परंपरा जुड़ी मानी जाती है.












