नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारक इंडिया गेट के आसपास का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल चुका है, जिसने सार्वजनिक स्थानों पर हमारे बुनियादी नागरिक बोध यानी ‘सिविक सेंस’ पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। इंडिया गेट के पास बने फव्वारे और उसके आसपास सुरक्षा और स्वच्छता के लिहाज से स्पष्ट निर्देश दर्ज थे कि ‘पानी में प्रवेश नहीं करें’, लेकिन इस चेतावनी को ठेंगा दिखाते हुए कुछ लोगों ने फाउंटेन को वाटर पार्क समझकर उसमें डुबकी लगानी शुरू कर दी। हद तो तब पार हो गई जब कुछ मनचलों ने चेतावनी बोर्ड पर लिखे ‘नहीं’ शब्द को ही मिटा दिया, ताकि वे अपनी इस बचकानी हरकत को सही ठहरा सकें।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखी प्रतिक्रियाओं का सैलाब आ गया है। आम जनता से लेकर इंटरनेट यूजर्स तक हर कोई इस गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहा है।
लोग खुलेआम प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि ऐसे नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले उपद्रवियों पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाना चाहिए ताकि वे सबक सीख सकें।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब एक्स पर @iNikhilsaini नाम के यूजर ने इस पूरी घटना का एक वीडियो साझा किया। इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में साफ-साफ बोर्ड लगे हुए हैं कि पानी के अंदर जाना वर्जित है। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर लोग न सिर्फ बेखौफ होकर फाउंटेन के अंदर उतर गए, बल्कि कुछ युवक तो बड़े फाउंटेन के ऊपर तक चढ़ने की कोशिश करते नजर आए। कई लोग फव्वारे के किनारे पैर लटकाकर बैठे थे, तो कुछ पानी के बीचोंबीच खड़े होकर वीडियो बनाते और मौज-मस्ती करते दिखे। इस पूरी अराजकता ने प्रशासनिक व्यवस्था और आम नागरिकों की संवेदनहीनता के बीच की खाई को उजागर कर दिया है।
यूजर्स ने की सख्त जुर्माने की मांग
एक यूजर ने स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताते हुए लिखा कि फाउंटेन का पानी तैरने या नहाने के बिल्कुल योग्य नहीं होता, ऐसे में गंदे पानी में उतरने से लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। एक अन्य यूजर ने तो यहां तक सुझाव दे डाला कि जिस तरह वित्तीय लेनदेन के लिए सिबिल स्कोर होता है, ठीक उसी तरह नागरिकों के लिए एक ‘सिविक सेंस स्कोर’ होना चाहिए और तय मानक से कम स्कोर वालों के ऐसे संवेदनशील या ऐतिहासिक क्षेत्रों में प्रवेश पर रोक लगनी चाहिए। कुछ समय पहले भी इंडिया गेट के आसपास फैले कचरे का वीडियो वायरल हुआ था, जिसे भी नागरिकों की उदासीनता से जोड़कर देखा गया था। देश के राष्ट्रीय स्मारकों के प्रति ऐसी लापरवाही इस बात की गवाही देती है कि प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ हमारी अपनी सामाजिक सोच में बदलाव आना अभी भी बाकी है।











