नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव और कूटनीतिक गतिरोध के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिका की पूर्व कांग्रेसवुमन मार्जोरी टेलर ग्रीन ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि वाइट हाउस के शीर्ष अधिकारी ईरान के खिलाफ संभावित परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर गोपनीय और रणनीतिक बैठकें कर रहे हैं। इस गंभीर दावे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक सुरक्षा हलकों में खलबली मचा दी है। हालांकि, ग्रीन ने अपने इस दावे के पक्ष में न तो कोई आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं और न ही उन बैठकों में शामिल अधिकारियों के नामों का खुलासा किया है। इसके बावजूद उनके इस बयान ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है।
तेहरान पर परमाणु हमले की रणनीति बना रहा वाशिंगटन
X पर जारी अपनी टिप्पणी में ग्रीन ने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन अपनी ही खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट्स और आकलनों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी इंटेलिजेंस के मुताबिक ईरान फिलहाल परमाणु बम या हथियार बनाने की स्थिति में नहीं है।
वॉशिंगटन अपनी खुफिया रिपोर्टों को ठंडे बस्ते में डालकर इजरायल द्वारा दी जा रही चेतावनियों को अधिक तवज्जो दे रहा है। ग्रीन का कहना है कि प्रशासन अपनी परमाणु नीति की सीमा को खतरनाक स्तर तक नीचे ला रहा है, जो सीधे तौर पर एक भीषण सैन्य टकराव की ओर इशारा करता है।
भीषण तबाही की दी चेतावनी
पूर्व कांग्रेसवुमन ने ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की परमाणु या कठोर सैन्य कार्रवाई के दूरगामी और भयानक नतीजों के प्रति आगाह किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि अमेरिका ऐसा कोई कदम उठाता है, तो इसके गंभीर वैश्विक परिणाम भुगतने होंगे। इससे न केवल अभूतपूर्व स्तर पर जान-माल का नुकसान होगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा जाएगी। ग्रीन ने डोनाल्ड ट्रंप को उनके उस चुनावी वादे की भी याद दिलाई, जिसमें उन्होंने अमेरिका को विदेशी युद्धों और अन्य देशों में शासन बदलने के अभियानों से दूर रखने की बात कही थी।
ट्रंप की समर्थक होकर भी नीतियों के खिलाफ रही हैं ग्रीन
यह पहला मौका नहीं है जब ग्रीन ने अपनी ही पार्टी के प्रशासन की विदेश नीति पर सवाल उठाए हों। यद्यपि वे खुद को डोनाल्ड ट्रंप का कट्टर समर्थक मानती हैं, लेकिन ईरान को लेकर अपनाए जा रहे सख्त रुख की वे पहले भी आलोचना कर चुकी हैं।
इससे पहले जून 2025 में जब ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले हुए थे, तब भी उन्होंने खुले तौर पर अपनी असहमति दर्ज कराई थी। ग्रीन का मानना है कि विदेशों में सैन्य हस्तक्षेप की यह नीति ट्रंप के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
वाइट हाउस की चुप्पी और ईरान की ओर से पलटवार
फिलहाल मार्जोरी टेलर ग्रीन के इन दावों पर वाइट हाउस या अमेरिकी रक्षा विभाग (पेरिस/पेंटागन) की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है। अमेरिकी सरकार ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि उसकी परमाणु नीति में बदलाव हुआ है। दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिका को कड़ा जवाब देते हुए क्षेत्रीय अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। दोनों देशों के बीच होर्मुज स्ट्रैट में जारी सैन्य गतिविधियों और तीखी बयानबाजी ने पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है। हैं। इस गंभीर दावे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक सुरक्षा हलकों में खलबली मचा दी है।












