अमेरिका के सख्त होने पर ईरान ने दीं चेतावनी, कहा- ‘इस कदम को माना जाएगा युद्ध’

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US Iran conflict
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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है. अमेरिकी सरकार ईरान पर नए और पहले से ज्यादा सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है. इस पर तेहरान ने साफ चेतावनी दी है कि ऐसे कदमों को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के खिलाफ युद्ध की घोषणा जैसा माना जाएगा. दोनों देशों के बीच पहले से जारी टकराव के बीच प्रतिबंधों की नई तैयारी ने हालात और गंभीर कर दिए हैं.

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि इस तरह के प्रतिबंधों के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है. उन्होंने अमेरिका पर अपनी नीतियां दूसरे देशों पर थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया. ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वाणिज्य मंत्री स्कॉट बेसेंट ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों की घोषणा कर सकते हैं. अमेरिका ने चीन से भी इन प्रतिबंधों को लागू करने में सहयोग मांगा है.

हालांकि, चीन ने अमेरिकी कदम का समर्थन नहीं किया है. चीन का कहना है कि ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने से पश्चिम एशिया का संकट खत्म नहीं होगा. उसने बातचीत और कूटनीति के जरिए विवाद सुलझाने पर जोर दिया है. चीन ईरान के प्रमुख तेल खरीदारों में शामिल है.

अमेरिकी दबाव के बावजूद ईरान का कड़ा रुख

पिछले कई महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है. अमेरिकी दबाव के बावजूद ईरान ने अपनी स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं किया है. दोनों देशों के बीच बातचीत भी अब तक किसी ठोस समझौते तक नहीं पहुंच सकी है. ऐसे में अमेरिका आर्थिक दबाव बढ़ाकर तेहरान को समझौते के लिए मजबूर करने की कोशिश कर रहा है.

ईरान के सेना प्रमुख मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि किसी भी सैन्य धमकी का जवाब कार्रवाई से दिया जाएगा. उन्होंने दुश्मन को गंभीर और भारी नुकसान पहुंचाने की चेतावनी दी. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान समझौता चाहता है, लेकिन अभी तक वह अमेरिका की शर्तों के मुताबिक उचित समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ है.

होर्मुज को लेकर भी बढ़ी खींचतान

ईरान और अमेरिका के बीच रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं. ट्रंप का दावा है कि इस अहम समुद्री रास्ते पर अमेरिका का नियंत्रण है. अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने पिछले एक सप्ताह में रोजाना करीब 80 लाख बैरल तेल ले जाने वाले जहाजों को होर्मुज पार करने में मदद की.

दूसरी ओर, शिप ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार गुरुवार को केवल चार मालवाहक जहाज ही जलडमरूमध्य से बाहर निकले. संघर्ष से पहले इस रास्ते से रोजाना करीब दो करोड़ बैरल कच्चे तेल की आवाजाही होती थी. ईरान ने इराकी तेल टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की विशेष अनुमति भी दी है. इसी बीच होर्मुज के संयुक्त प्रबंधन को लेकर ईरान और ओमान के बीच चर्चा की खबरों के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ओमान के राजदूत तलाल अल राहबी से मुलाकात की.

ईरान ने अमेरिकी अभियान को बताया कमजोर

ईरान से जुड़े बसीज संगठन के प्रमुख होज्जतोलेस्लाम तईब ने दावा किया कि हालिया संघर्ष ने अमेरिका की सैन्य कमजोरियों को सामने ला दिया है. उनका कहना है कि अमेरिकी सेना को अपनी ताकत पर इतना भरोसा था कि वह कम समय में ईरान को झुका देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. तईब ने दावा किया कि ईरान ने अमेरिकी दबाव का सामना करते हुए उसे युद्धविराम और बातचीत की ओर बढ़ने के लिए मजबूर किया. हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय नए प्रतिबंधों की तैयारी से स्थिति और पेचीदा होती दिखाई दे रही है.

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