कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलनों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने दशहरे के अवसर पर जारी करीब 16 मिनट के वीडियो संदेश में अपने दो साथियों के बारे में खुलकर बात की। उनके मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका आंदोलन की दिशा तय करने और महत्वपूर्ण फैसले लेने में बड़ी भूमिका निभाते रहे हैं। दीपके ने कहा कि बाहर से भले ही लोगों को ऐसा लगता था कि वह आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।
लेकिन कई गतिविधियों की योजना और अगले दिन के कार्यक्रमों के बारे में दोनों साथी उन्हें जानकारी देते थे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि फैसले लेने के मामले में सौरव और रांका उनसे बेहतर क्षमता रखते हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो साझा होने के बाद पार्टी के कामकाज और नेतृत्व को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
साथियों को केवल नेता नहीं, परिवार का हिस्सा बताया
वीडियो में दीपके अपने दोनों साथियों का जिक्र करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका उनके लिए केवल राजनीतिक सहयोगी नहीं, बल्कि भाइयों जैसे हैं। दोनों के जेल में होने से उन्हें गहरा भावनात्मक आघात पहुंचा है।
दीपके ने अपने निजी रिश्ते का जिक्र करते हुए बताया कि तीनों का एक अलग व्हाट्सऐप ग्रुप था, जहां वे मीम और दूसरे संदेश साझा करते थे। उनके मुताबिक, आज भी वह ग्रुप खोलकर अपने साथियों की मौजूदगी महसूस करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों नेताओं के परिवार इस कठिन समय में उन्हें हिम्मत दे रहे हैं।
दिवाली तक कोई नया प्रदर्शन नहीं करने का ऐलान
अपने वीडियो संदेश में CJP संस्थापक ने स्पष्ट किया कि दिवाली तक पार्टी की ओर से कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। उन्होंने समर्थकों से कुछ समय के लिए आंदोलनकारी गतिविधियों से विराम लेने और अपने परिवारों के साथ समय बिताने की अपील की।
पार्टी इससे पहले भी शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में चलाया गया एक आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ था। इसके बाद CJP ने सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के उद्देश्य से अभियान शुरू किया। इसके तहत पार्टी के सदस्य स्कूलों का औचक निरीक्षण करते थे।
जंतर-मंतर मामले में दोनों नेता न्यायिक हिरासत में
सौरव दास और आशुतोष रांका 13 अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों उन कार्यकर्ताओं में शामिल थे, जिन्होंने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश की थी। पुलिस का आरोप है कि कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार किए और एक बंद गेट से उस स्थान में प्रवेश किया, जिसे प्रदर्शन स्थलों की निर्धारित सूची से हटाया जा चुका था।
इस मामले में दोनों पर शांति बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप भी लगाए गए हैं। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। यह विरोध विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) और उससे जुड़े फैसलों के खिलाफ था।
गांधी के सत्याग्रह से की आंदोलन की तुलना
दीपके ने अपने साथियों के विरोध के तरीके की तुलना महात्मा गांधी के सत्याग्रह से की। उनका कहना था कि जेल जाने के बावजूद दोनों ने गुस्से और नफरत के बजाय शांति का रास्ता अपनाया। उन्होंने CJP के प्रदर्शनों की तुलना फ्रांस में हुई हिंसा और आगजनी से किए जाने पर भी आपत्ति जताई।
इस वीडियो में एक ओर दीपके ने अपने साथियों के साथ निजी जुड़ाव जाहिर किया, तो दूसरी ओर आंदोलन की अगुवाई और फैसलों में उनकी भूमिका को लेकर अपना नजरिया सामने रखा। दोनों नेताओं के खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।












