आशुतोष दीक्षित संभालेंगे वायुसेना की कमान, चार दशक का शानदार सैन्य अनुभव साथ

0
5

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना की अगली कमान एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को सौंपी गई है। वह वर्तमान एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का स्थान लेंगे और 31 अक्टूबर की दोपहर से वायुसेना प्रमुख की जिम्मेदारी संभालेंगे। फिलहाल वह वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ के पद पर कार्यरत हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब भारतीय वायुसेना तेजी से आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा तकनीक और भविष्य की हवाई युद्ध क्षमता को मजबूत करने पर जोर दे रही है। दीक्षित का लंबा परिचालन अनुभव, अलग-अलग लड़ाकू विमानों पर उड़ान का रिकॉर्ड और महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों से जुड़ाव उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए खास बनाता है। आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था।

उनका जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ था। सैन्य शिक्षा के दौरान उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी, डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज में प्रशिक्षण हासिल किया। करीब 40 वर्षों की सेवा के दौरान वह अलग-अलग परिचालन और कमांड जिम्मेदारियों से गुजरते हुए शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे हैं।

कई तरह के लड़ाकू और परिवहन विमान उड़ाए

दीक्षित के करियर की एक खास बात उनका व्यापक उड़ान अनुभव है। उन्होंने मिराज-2000, मिग सीरीज के विभिन्न विमान, जगुआर, किरण, हॉक और तेजस जैसे लड़ाकू एवं प्रशिक्षण विमानों के साथ-साथ एएन-32, एवरो और आईएल-78 जैसे परिवहन तथा सपोर्ट विमानों पर भी उड़ान भरी है। उनके पास 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव बताया गया है। वह एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी रह चुके हैं।

ऑपरेशन और सैन्य अभ्यासों का लंबा अनुभव

एयर मार्शल दीक्षित कई अहम सैन्य अभियानों और अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों से जुड़े रहे हैं। उनके करियर में ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक, कोप इंडिया और ऑपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका ने भी उनके परिचालन अनुभव को महत्वपूर्ण बनाया। अलग-अलग परिस्थितियों में हवाई अभियानों की योजना और संचालन से जुड़ा यह अनुभव अब वायुसेना की शीर्ष कमान में उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी कमान में भी निभाई जिम्मेदारी

शीर्ष स्तर पर पहुंचने से पहले दीक्षित ने वायुसेना की अलग-अलग कमांड संरचनाओं में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वह सदर्न एयर कमांड में एयर डिफेंस कमांडर और साउथ वेस्टर्न एयर कमांड में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर रह चुके हैं। इन जिम्मेदारियों ने उन्हें देश के अलग-अलग रणनीतिक क्षेत्रों में वायु सुरक्षा और ऑपरेशनल तैयारियों को करीब से समझने का अवसर दिया।

तेजस और स्वदेशी तकनीक पर नजर

दीक्षित का करियर केवल ऑपरेशनल उड़ानों तक सीमित नहीं रहा। वह भारतीय विमानन और स्वदेशी एयरोस्पेस कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे हैं। तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमान के विकास और उपयोग से जुड़े अनुभव के कारण उनसे वायुसेना में आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है। उनके कार्यकाल में स्वदेशी प्लेटफॉर्म, आधुनिक हथियार प्रणालियों, नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता और नई तकनीक पर विशेष जोर रह सकता है।

सेवा के दौरान मिले कई बड़े सम्मान

लंबी सैन्य सेवा के दौरान आशुतोष दीक्षित को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें 2006 में वायु सेना मेडल, 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल, 2023 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल मिला। अब 31 अक्टूबर से उनके सामने भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को मजबूत रखने के साथ आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण को आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here